डीएसआईआर के 42वें स्थापना दिवस के अवसर पर सरकार ने डीएसआईआर मान्यता प्रक्रिया में डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष छूट देने की घोषणा की, जिससे भारत के अनुसंधान, विकास और नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती मिली
डीएसआईआर के 42वें स्थापना दिवस के अवसर पर सरकार ने डीएसआईआर मान्यता प्रक्रिया में डीप-टेक स्टार्टअप्स को विशेष छूट देने की घोषणा की, जिससे भारत के अनुसंधान, विकास और नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती मिली
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, अंतरिक्ष विभाग तथा परमाणु ऊर्जा विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमओएसटी) के अधीन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के 42वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने डीएसआईआर के औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम के अंतर्गत मान्यता प्राप्त करने हेतु डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए अनिवार्य तीन वर्ष की अस्तित्व संबंधी शर्त में एक बड़ी छूट की घोषणा की।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम से स्टार्टअप परियोजनाओं के शुरुआती चरण में कार्यरत नवप्रवर्तकों के साथ-साथ होनहार नवोन्मेषकों और उद्यमियों को आवश्यक प्रारंभिक सहयोग और गति मिलने की उम्मीद है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम से स्टार्टअप परियोजनाओं के शुरुआती या नवप्रवर्तकों के साथ-साथ होनहार नवोन्मेषकों और उद्यमियों को शुरुआती गति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण के नवप्रवर्तकों या स्टार्टअप्स के लिए, डीएसटी, सीएसआईआर, टीडीबी और अन्य विभागों में पहले से ही कई योजनाएं मौजूद हैं। यहां तक कि उनके पूरी तरह से आत्मनिर्भर होने से पहले भी तीन साल के अस्तित्व की आवश्यकता को हटाना डीप-टेक स्टार्टअप्स को तेजी से आगे बढ़ने में मदद करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह सुधार भारत के नवप्रवर्तकों में सरकार के विश्वास और उनकी स्थिरता व इरादे में उसके भरोसे को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि सीएसआईआर पूर्व में भी स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान करता रहा है, जिसमें विभिन्न राशि के ऋण शामिल थे और कुछ मामलों में यह सहायता 1 करोड़ रुपये तक भी रही है। हालांकि, यह सहायता न्यूनतम तीन वर्षों के अस्तित्व के माध्यम से स्थिरता और व्यवहार्यता प्रदर्शित करने की अनिवार्य शर्त से जुड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि अब ‘उस आवश्यकता को अब समाप्त कर दिया गया है। श्री सिंह ने इस कदम को एक प्रमुख प्रोत्साहन बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य नई डीप-टेक स्टार्टअप्स को उनके पूरी तरह स्थापित होने से पहले ही आवश्यक गति और सहायता प्रदान करना तथा उन्हें बनाए रखना है, साथ ही तकनीकी परिपक्वता से जुड़े उचित मूल्यांकन मानकों को भी सुनिश्चित करना है।
केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर पूरे डीएसआईआर परिवार को बधाई दी और डीएसआईआर तथा सीएसआईआर के बीच के संबंधों को ‘पीढ़ीगत सहजीवन’ के रूप में वर्णित किया, जिसमें दोनों संस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं व परस्पर सुदृढ़ होती हैं। उन्होंने संयुक्त परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि यद्यपि डीएसआईआर का उद्भव सीएसआईआर से हुआ है, किंतु वर्तमान में सीएसआईआर की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रक्रियाओं, समझौता ज्ञापनों और उद्योग साझेदारियों को सशक्त बनाने में डीएसआईआर की सहायक भूमिका भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। श्री सिंह ने इस बात पर बल दिया कि इस घनिष्ठ समन्वय ने अंतःविषयक विज्ञान को अंतरपीढ़ीगत सहयोग में परिवर्तित किया है, जो भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए अब ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां अन्य देश तेजी से भारतीय क्षमताओं पर निर्भर होते जा रहे हैं। टीकों, चिकित्सा उपकरणों और स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत आयात-निर्भरता से बाहर निकलकर करोड़ों रुपये के निर्यात की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की बढ़ती वैश्विक स्वीकृति को दर्शाता है। श्री सिंह ने कहा, “हम न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि हम दूसरों को भी हम पर निर्भर बना रहे हैं।”
केंद्रीय मंत्री ने डीएसआईआर के चार स्तंभों विज्ञान, उद्योग, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर जोर देते हुए कहा कि उद्योग के सक्रिय सहयोग के बिना सार्थक अनुसंधान को बनाए रखना संभव नहीं है, क्योंकि वे ही इस प्रक्रिया का एक प्रारंभिक व अनिवार्य भागीदार है। उन्होंने बताया कि डीएसआईआर की भूमिका अब केवल प्रमाणन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सीमा शुल्क छूट जैसे वित्तीय प्रोत्साहनों तक विस्तारित हो चुकी है, जिससे उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा स्टार्टअप्स के लिए सरकार-समर्थित अनुसंधान और विकास में भागीदारी व अधिक आकर्षक बन गई है।
केंद्रीय मंत्री ने महिलाओं की मजबूत भागीदारी पर भी प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान में 10,000 से अधिक महिला लाभार्थी डीएसआईआर की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हो रही हैं, जिनमें 55 से अधिक महिला-नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह शामिल हैं। उन्होंने इसे भारत की नवाचार संस्कृति में एक स्वस्थ, समावेशी और अपरिवर्तनीय बदलाव करार दिया।
स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर मंत्री द्वारा चार महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की शुरुआत की गई:
डीप-टेक स्टार्टअप्स के इन-हाउस आर एंड डी केंद्रों की मान्यता के लिए डीएसआईआर के दिशानिर्देश, जिसमें तीन साल के अस्तित्व की शर्त में छूट शामिल है।
प्रिज़्म नेटवर्क प्लेटफॉर्म – टीओसीआईसी इनोवेटर पल्स, जिसका उद्देश्य नवाचार की प्रक्रियाओं को मजबूत करना है।
नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रिज़्म योजना के तहत क्रिएटिव इंडिया 2025। डीएसआईआर आपदा प्रबंधन योजना, तैयारी और लचीलेपन को सुदृढ़ करना।
केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों और समझौतों का आदान-प्रदान किया गया:
ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित कौशल विकास और आजीविका सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला प्रौद्योगिकी विकास एवं उपयोग कार्यक्रम (टीडीयूपीडब्ल्यू) के अंतर्गत एनआईटी रायपुर के सहयोग से छत्तीसगढ़ के धमतरी में एक कौशल उपग्रह केंद्र की स्थापना हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
सीएसआईआर–सीईईआरआई, पिलानी द्वारा सहायता प्राप्त कॉमन रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट हब्स (सीआरटीडीएच) कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित प्रौद्योगिकियों के लिए उद्योग भागीदारों को लाइसेंस प्रदान करने हेतु किए गए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) समझौते, देश भर में एमएसएमई-केंद्रित अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना को सुदृढ़ करने के प्रयासों को रेखांकित करते हैं।
इस कार्यक्रम में विज्ञान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के वरिष्ठ नेतृत्वकर्ताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। इनमें डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी; भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद; एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एस.सी.एल. दास; पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन; डीएसआईआर के संयुक्त सचिव महेंद्र गुप्ता तथा स्थापना दिवस आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. विपिन शुक्ला सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे।
अपने संबोधन में, डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने देश भर में आंतरिक अनुसंधान एवं विकास इकाइयों, एसआईआरओ और सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अनुसंधान संस्थानों को मान्यता देने में विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डीएसआईआर की अनूठी संरचना ने इसे सरकार, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच एक प्रभावी कड़ी के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाया है, जिसमें एक विभाग, सीएसआईआर जैसे स्वायत्त संगठन और सीईएल एवं एनआरडीसी जैसे दो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम शामिल हैं। डॉ. कलैसेल्वी ने डीएसआईआर की बढ़ती लोकप्रियता और इस वर्ष के स्थापना दिवस समारोह के भव्य आयोजन पर संतोष व्यक्त किया और विज्ञान एवं नवाचार के माध्यम से राष्ट्रीय विकास के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने वर्तमान भू-राजनीतिक संदर्भ में प्रौद्योगिकी संप्रभुता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान एवं विकास निधि का उल्लेख करते हुए कहा कि विशेष रूप से टीआरएल-4 और उससे ऊपर के स्तर पर, प्रयोगशाला से बाजार तक तकनीकी प्रगति को व्यापक स्तर पर ले जाने और निजी क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को सशक्त बनाने की आवश्यकता है। प्रो. सूद ने प्रौद्योगिकी के मूल्यांकन में अधिक सटीकता व वस्तुनिष्ठता लाने के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी तत्परता मूल्यांकन ढांचा (एनटीआरएफ) के विकास पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने मंथन तथा उत्थान जैसे प्लेटफार्मों का उल्लेख किया, जो मांग-आधारित नवाचार को बढ़ावा देने और द्वितीय एवं तृतीय स्तर के संस्थानों की भागीदारी को सक्षम बनाने में मदद कर रहे हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम का समापन करते हुए दोहराया कि डीएसआईआर का कार्य ऊर्जा संक्रमण, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों, विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, एआई और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में राष्ट्रीय मिशनों के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि तीन वर्ष के अस्तित्व मानदंड में ढील देने का उद्देश्य ‘नए स्टार्टअप्स को आवश्यक गति और सहायता प्रदान करना और उन्हें बनाए रखना’ है। श्री सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत के नवप्रवर्तक इस अवसर का जिम्मेदारी और उत्साह के साथ उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा, ‘यह स्थापना दिवस केवल अतीत का उत्सव नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए तैयार, प्रौद्योगिकी-संप्रभु भारत के निर्माण की दिशा में एक निर्णायक कदम है।’