डिजिटल इंडिया भाषिनी विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर
डिजिटल इंडिया भाषिनी विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग ने 19 जनवरी 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की राष्ट्रीय समीक्षा के चिंतन शिविर में भाग लिया। यह समीक्षा बैठक राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) द्वारा आयोजित की गई थी। देश भर में डिजिटल स्वास्थ्य पहलों को अपनाने में हुई प्रगति की समीक्षा करने और इसे गति देने के लिए इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों, तकनीकी संस्थानों और कार्यान्वयन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
विचार-विमर्श एआई-संचालित नवाचार और समावेशी भाषा पहुंच के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य को आगे बढ़ाने के राष्ट्रीय उद्देश्य के अनुरूप था। इसमें डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म भाषाई और भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ कर प्रयोग करने योग्य, सुलभ और प्रभावी होना सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस आयोजन के पहले दिन का एक प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करना रहा। इसका उद्देश्य एबी पीएम-जेएवाई और एबीडीएम सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफार्मों पर बहुभाषी अनुवाद सेवाओं और एआई-संचालित भाषा समर्थन को सक्षम बनाना है।
ओडिशा सरकार , राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति में उद्घाटन सत्र के दौरान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस सहयोग के तहत भाषिनी की अनुवाद एपीआई, वाक् पहचान और टेक्स्ट-टू-स्पीच टूल सहित भाषा प्रौद्योगिकियों को लाभार्थी-केंद्रित और प्रशासनिक अनुप्रयोगों में एकीकृत किया जाएगा। इससे सभी के लिए सेवा वितरण को सुदृढ़ किया जा सकेगा और नागरिकों की सहभागिता को बढ़ाया जा सकेगा।
राष्ट्रीय समीक्षा बैठक का शुभारंभ ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य सचिव के स्वागत भाषण से हुआ। इसके बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने प्रारंभिक बात सबके सामने रखी। उद्घाटन सत्र में ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य मंत्री श्री मुकेश महालिंग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहें। इस अवसर पर एबी पीएम-जेएवाई के अंतर्गत स्वास्थ्य लाभ पैकेज नियमावली और सर्वोत्तम तौर तरीकों का संकलन भी जारी किया गया , साथ ही सहयोगी संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ।
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमिताभ नाग ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में भाग लिया और “एआई नवाचार और समावेशी भाषा पहुंच के साथ डिजिटल स्वास्थ्य को आगे बढ़ाना” विषय पर एक प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे देश भर में डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों का विस्तार हो रहा है, एआई को अपनाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया बन जाती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत जैसे भाषाई विविधता वाले देश में एआई से सार्थक जनहित प्राप्त करने के लिए, इसका बहुभाषी और ध्वनि-सक्षम होना आवश्यक है , ताकि भाषा स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बाधा न बने। उन्होंने यह भी कहा कि भाषा-आधारित एआई नागरिक सहभागिता, शिकायत निवारण तंत्र, नैदानिक दस्तावेज़ीकरण और डिजिटल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्लेटफार्मों की समग्र पहुंच में उल्लेखनीय सुधार कर सकता है।
एबीडीएम के संयुक्त सचिव श्री किरण गोपाल वास्का ने चिंतन शिविर की चर्चा के दौरान, स्वास्थ्य सेवा वितरण में भाषा एआई के व्यावहारिक लाभों के बारें में बताया। उन्होंने कहा कि वॉइस-टू-टेक्स्ट और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसे एआई-सक्षम उपकरण, मरीजों और डॉक्टरों के बीच निर्बाध संवाद स्थापित करके डॉक्टरों की समय की कमी को दूर करने में मदद कर सकते हैं, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड को स्वचालित रूप से तैयार करने की सुविधा प्रदान कर सकते हैं। इससे दक्षता में सुधार होगा और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूती मिलेगी।
डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन इस साझेदारी के माध्यम से, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को लाभार्थी-उन्मुख और प्रशासनिक प्लेटफार्मों पर बहुभाषी और ध्वनि-सक्षम समाधानों को तैनात करने में सहायता करेगा। इसमें जिम्मेदार डेटा प्रबंधन, सुरक्षित सिस्टम एकीकरण और वास्तविक दुनिया के उपयोग और प्रतिक्रिया के माध्यम से भाषा मॉडल में निरंतर सुधार के प्रावधान शामिल हैं।
यह समझौता ज्ञापन सरकार के भारतीय भाषाओं को देश के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में एकीकृत करने और स्वास्थ्य क्षेत्र में नागरिक-केंद्रित, एआई-सक्षम शासन को बढ़ावा देने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।