Monday, January 5, 2026
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ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी 31 दिसंबर 2025 को ‘लैंड स्टैक’ का शुभारंभ करेंगे और ‘राजस्व शर्तों की शब्दावली’ जारी करेंगे

ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी 31 दिसंबर 2025 को ‘लैंड स्टैक’ का शुभारंभ करेंगे और ‘राजस्व शर्तों की शब्दावली’ जारी करेंगे

डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के तहत भूमि प्रशासन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने 31 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और तमिलनाडु के चिन्हित स्थलों पर ‘लैंड स्टैक’ (भूमि-प्रणाली) का शुभारंभ किया और साथ ही ‘राजस्व शर्तों की शब्दावली’ (जीओआरटी) भी जारी की है।

ये पहल आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित भूमि शासन की दिशा में एक बदलाव का प्रतीक हैं। यह पहल भारत की ऐतिहासिक भूमि अभिलेख प्रणालियों को समकालीन डिजिटल शासन की मांगों के अनुरूप बनाती हैं।

लैंड स्टैक: सूचित निर्णय लेने में सहायक

सिंगापुर, ब्रिटेन और फिनलैंड जैसे देशों में प्रचलित अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम तौर-तरीकों से प्रेरणा लेते हुए, लैंड स्टैक को एक एकीकृत, जीआईएस-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में परिकल्पित किया गया है।

वर्तमान में, नागरिकों को अक्सर विभिन्न विभागों से आधी-अधूरी जानकारी प्राप्त होती है। लैंड स्टैक नागरिकों और सरकारी एजेंसियों दोनों के लिए भूमि और संपत्ति सम्बंधी जानकारी तक एकल पहुंच प्रदान करके इस समस्या का समाधान करता है।

लैंड स्टैक के लाभ:

लैंड स्टैक पोर्टल भूमि सम्बंधी जानकारी तक एकीकृत पहुंच के माध्यम से नागरिकों को सोच-समझकर निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।

इससे नागरिकों की सुविधा, पारदर्शिता और विश्वास में वृद्धि होती है।

इससे अनधिकृत या नियमों का पालन न करने वाली संपत्तियों की अनजाने में खरीद का जोखिम कम हो जाता है।

यह अंतर-विभागीय समन्वय को बेहतर बनाता है और डेटा-आधारित शासन को बढ़ावा देता है।

यह भूमि प्रशासन में एक महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस सुधार का प्रतिनिधित्व करता है।

 

 

राजस्व शर्तों की शब्दावली(जीओआरटी): भाषाई अंतर को पाटना

भारत का भूमि प्रशासन टोडरमल के राजस्व सुधारों से लेकर ब्रिटिश बंदोबस्ती प्रणालियों (रैयतवारी, महलवारी) तक विविध ऐतिहासिक प्रभावों से आकारित है। इसके परिणामस्वरूप, खसरा, दाग या पुला जैसे शब्द समान अवधारणाओं को संदर्भित कर सकते हैं, जबकि एक ही शब्द के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं।

इस समस्या के समाधान के लिए, कृषि विभाग ने पुणे के यशदा स्थित भूमि प्रशासन और प्रबंधन उत्कृष्टता केंद्र (सीओई-एलएएम) के सहयोग से राजस्व शर्तों की शब्दावली तैयार की है।

जीओआरटी की मुख्य विशेषताएं:

यह स्थानीय भाषा, हिंदी, अंग्रेजी और रोमन लिपियों में भूमि से सम्बंधित विभिन्न राजस्व शब्दों के अर्थ प्रदान करता है ।

इसका उद्देश्य बिना राज्य-विशिष्ट शब्दावली को प्रतिस्थापित किए शब्दावली में सामंजस्य स्थापित करना है ताकि भूमि सम्बंधी आंकड़ों को राष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय और अंतर-संचालनीय बनाया जा सके।

यह राजस्व अधिकारियों, नीति निर्माताओं, न्यायिक अधिकारियों और नागरिकों के लिए एक आधिकारिक संदर्भ के रूप में कार्य करता है।

इन पहलों की शुरुआत देश के विविध भूमि प्रशासन में सामंजस्य लाने के लिए एक सामूहिक राष्ट्रीय प्रयास का प्रतिनिधित्व करती है।

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