ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना
ग्रामीण पर्यटन सहित पर्यटन स्थलों और उत्पादों का विकास और प्रचार-प्रसार संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है।
पर्यटन मंत्रालय विभिन्न पहलों के माध्यम से भारत का समग्र रूप से प्रचार करता है। चल रही गतिविधियों के अंतर्गत, ग्रामीण होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना भी शामिल है। पर्यटन मंत्रालय अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से विभिन्न पर्यटन स्थलों और ग्रामीण पर्यटन उत्पादों का नियमित रूप से प्रचार करता है।
पर्यटन मंत्रालय अपनी स्वैच्छिक योजना ‘इंक्रेडिबल इंडिया बेड एंड ब्रेकफास्ट एस्टैब्लिशमेंट्स’ के तहत देश में होमस्टे सुविधाओं का वर्गीकरण करता है।
पर्यटन मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत ग्रामीण सर्किट को एक विषयगत सर्किट के रूप में चिन्हित किया है। ग्रामीण पर्यटन सहित पर्यटन संबंधी अवसंरचना के विकास के लिए परियोजनाओं/प्रस्तावों को राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के परामर्श से दिशानिर्देशों के अनुसार सर्किट के अंतर्गत विकास के लिए चिन्हित किया जाता है।
पर्यटन मंत्रालय की स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 के रूप में नया रूप दिया गया है, जिसका उद्देश्य पर्यटन और गंतव्य केंद्रित दृष्टिकोण का पालन करते हुए टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन स्थलों का विकास करना है।
पर्यावरण स्थिरता, मंत्रालय द्वारा तैयार की गई और राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी गई सतत पर्यटन के लिए राष्ट्रीय रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ है। इस रणनीति के अनुरूप, पर्यटकों और पर्यटन व्यवसायों को सतत पर्यटन प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु ‘ट्रैवल फॉर लाइफ’ कार्यक्रम शुरू किया गया था।
सरकार ने ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ के अंतर्गत स्वदेश दर्शन योजना के तहत आदिवासी होमस्टे विकसित करने की पहल को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 1000 होमस्टे का विकास किया जाएगा, जिसमें प्रति यूनिट 5 लाख रुपये तक (नए निर्माण के लिए), 3 लाख रुपये तक (नवीनीकरण के लिए) और ग्राम समुदाय की आवश्यकताओं के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
यह जानकारी केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।