Wednesday, January 28, 2026
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केवड़िया में सरदार@150 पदयात्रा के ऐतिहासिक समापन पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर राष्ट्र एकजुट हुआ

केवड़िया में सरदार@150 पदयात्रा के ऐतिहासिक समापन पर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर राष्ट्र एकजुट हुआ

भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित एक ‘समर्पित श्रद्धांजलि स्वरूप’ 26 नवंबर 2025 को करमसद से शुरू हुआ ऐतिहासिक सरदार@150 यूनिटी मार्च आज गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर एक भव्य समारोह में संपन्न हुआ। यह हाल के समय के सबसे बड़े जन-नेतृत्व वाले आंदोलनों में से एक बन गया। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे आज पदयात्रा के अंतिम चरण में शामिल हुए और गरुड़ेश्वर दत्त मंदिर से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक प्रतिभागियों के साथ पैदल चले। इससे इस ऐतिहासिक पदयात्रा के समापन दिवस को अपार प्रेरणा और गति मिली।

10 दिन के बाद भी राष्ट्रीय एकता पदयात्रा में MY Bharat के युवा साथियों का वही जोश और उत्साह है जो पहले दिन था। #Sardar150 pic.twitter.com/FsW8n0GOpi

आज के दिन के कार्यक्रमों के एक भाग के रूप में, कार्यक्रम की शुरुआत स्मृति वन में “एक पेड़ माँ के नाम” पहल के साथ हुई, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति पदयात्रा की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। बाद में, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर चौक, केवड़िया कॉलोनी, एकता नगर स्थित प्रेरणा स्थल पर, श्री मनसुख मांडविया ने संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. आंबेडकर को महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर ‘प्रतिमा सम्मान’ करके उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सरदार@150 एकता मार्च, सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में भारत सरकार द्वारा आयोजित दो-वर्षीय राष्ट्रव्यापी समारोहों का एक प्रमुख घटक है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर सरदार@150 यूनिटी मार्च के भव्य समापन समारोह में राष्ट्रीय और राज्य के नेताओं का एक प्रतिष्ठित समूह उपस्थित था। भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उनके साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फड़णवीस; गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत; केंद्रीय युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया; गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल; केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री श्री तोखन साहू; केंद्रीय पंचायती राज और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह; केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खड़से और कई अन्य प्रमुख नेता एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। इन सभी ने इस अवसर के राष्ट्रीय महत्व को दर्शाया और मार्च के समापन को और अधिक गंभीरता प्रदान की।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि सरदार@150 पदयात्रा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व से प्रेरित है, जिन्होंने देश भर में कई कार्यक्रमों के माध्यम से सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में दो वर्षों तक व्यापक समारोह आयोजित करने की पहल की थी। उन्होंने कहा कि ज़िला-स्तरीय पदयात्राओं में लाखों नागरिकों ने भाग लिया जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना और ‘आत्मनिर्भर भारत’ एवं ‘विकसित भारत’ के निर्माण के संकल्प को दर्शाती है और इस राष्ट्रीय आकांक्षा को साकार करने में युवा शक्ति की केंद्रीय भूमिका रही है।

डॉ. मांडविया ने बताया, “देश के कोने-कोने से युवा लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि देने के लिए सरदार@150 के अवसर पर पदयात्रा में शामिल हुए।”

डॉ. मांडविया ने कहा “माई भारत प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत युवाओं की सक्रिय भागीदारी से यह 182 किलोमीटर लंबी पदयात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई है। पिछले 10 दिनों में 717 जिलों के 3.5 लाख युवा इस राष्ट्रीय पदयात्रा में शामिल हुए और सरदार पटेल के जीवन और आदर्शों से प्रेरणा ली।” उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री को इस शानदार व्यवस्था के लिए बधाई दी और सभी युवाओं को उनकी उत्साहपूर्ण भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पदयात्रा का सफल समापन राष्ट्रीय एकता का एक सशक्त उदाहरण है।

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल ने समापन समारोह में कहा कि राष्ट्र निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल का अद्वितीय योगदान आज भी भारत का मार्गदर्शन करता है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अटूट प्रतिबद्धता के साथ सरदार पटेल के मार्ग पर चलकर उनकी विरासत का सम्मान किया है। सरदार पटेल के इस विश्वास को याद करते हुए कि राष्ट्र सर्वोपरि होना चाहिए, उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा इसी भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पदयात्रा ने लोगों को एक भारत, श्रेष्ठ भारत के लिए एकजुट किया है और विश्वास व्यक्त किया कि यही सामूहिक संकल्प देश को विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण की ओर ले जाएगा।

गुजरात के राज्यपाल, श्री आचार्य देवव्रत ने इस अवसर पर कहा कि सरदार@150 एकता मार्च का असाधारण प्रभाव पड़ा है जिसमें पूरे भारत के लोग एकता के अद्भुत प्रदर्शन के लिए एक साथ आए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एक ऐसे युग में जब ब्रिटिश शासन का विरोध करने का साहस बहुत कम लोग करते थे तब सरदार वल्लभभाई पटेल गांधीजी की शिक्षाओं से प्रेरित होकर गांव-गांव जाकर किसानों की रक्षा के लिए, अन्यायपूर्ण कराधान के विरुद्ध साहसपूर्वक खड़े हुए थे। इस संघर्ष के परिणामस्वरूप अंततः कर में ऐतिहासिक कमी आई और उन्हें सरदार की सम्मानित उपाधि मिली। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक भारत, श्रेष्ठ भारत के आदर्शों के माध्यम से सरदार पटेल के राष्ट्रीय एकता के दृष्टिकोण को पुनर्जीवित किया है।

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने सरदार@150 एकता मार्च के समापन को “भारत की एकता, कर्तव्य और राष्ट्र निर्माण की चिरस्थायी भावना का उत्सव” बताया। उन्होंने कहा कि देश भर के पदयात्रियों की भागीदारी यह सिद्ध करती है कि सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा प्रज्वलित एकता की ज्योति आज भी प्रज्वलित है और सदैव प्रज्वलित रहेगी। सरदार पटेल को अखंड भारत के निर्माण के लिए 560 से अधिक रियासतों का एकीकरण करने वाले वास्तुकार बताते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्र उनका सदैव ऋणी रहेगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत सदैव सरदार पटेल का कृतज्ञ रहेगा जिनके नेतृत्व ने एक विखंडित भूमि का एकीकरण किया और एक सच्चे अखंड राष्ट्र की नींव रखी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरदार पटेल का एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का सपना तेजी से साकार हो रहा है जिनके सुधार और युवा-केंद्रित पहल देश को विकसित भारत 2047 की ओर अग्रसर कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से एकता, अनुशासन और राष्ट्रीय भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में प्रतिदिन योगदान देने का आग्रह किया। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि यह पदयात्रा एक आत्मविश्वास से भरे नए भारत के सामूहिक संकल्प को दर्शाती है। अपने भाषण के समापन पर उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकता है और “भारत एक था, एक है और हमेशा एक रहेगा।”

एक प्रतीकात्मक राष्ट्रीय पदयात्रा के रूप में शुरू हुआ यह अभियान अमृत पीठ की युवा शक्ति, नागरिकों और 29 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के समुदायों द्वारा संचालित एक व्यापक, देशव्यापी आंदोलन में बदल गया। देश भर में 1,527 जिला-स्तरीय पदयात्राएँ आयोजित की गईं जिनमें 450 से ज़्यादा लोकसभा क्षेत्रों और 640 से ज़्यादा जिलों को शामिल किया गया। इसमें ज़िला एवं विधानसभा-क्षेत्र स्तर पर 15 लाख से ज़्यादा लोग एक साथ आए। इसमें 717 ज़िलों का प्रतिनिधित्व करने वाले 3.5 लाख युवा राष्ट्रीय पदयात्रा में शामिल हुए। गरुड़ेश्वर दत्त मंदिर से निकला यह समापन जुलूस दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा तक जैसे ही पहुंचा तो पूरा माहौल देशभक्ति के जोश और सामूहिक गौरव से भर गया। भारत की विशाल विविधता को प्रतिध्वनित करने वाले सांस्कृतिक प्रदर्शनों, डॉ. बी.आर. अंबेडकर सहित राष्ट्रीय प्रतीकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और भारत के सतत भविष्य के प्रतीक के रूप में एक विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम के साथ, यह मार्च राष्ट्रीय जागृति के एक क्षण के रूप में संपन्न हुआ। यह यात्रा एक भारत-आत्मनिर्भर भारत का जश्न मनाते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल की कालातीत विरासत की पुष्टि करती है, जिनकी एकता की दृष्टि राष्ट्र को आगे बढ़ाने का मार्गदर्शन करती है।

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