केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर के भविष्य के रोडमैप की समीक्षा की
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर के भविष्य के रोडमैप की समीक्षा की
विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, अंतरिक्ष विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने आज अनुसंधान भवन में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
केंद्रीय मंत्री ने बैठक के दौरान महत्वपूर्ण एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करने के लिए सीएसआईआर के प्रयासों और योजनाओं की सराहना की। इसका देश के विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ समग्र आर्थिक विकास पर प्रभाव पड़ेगा।
सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव एन. कलाइसेल्वी ने सीएसआईआर का दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया। इसमें विकसित भारत की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप देश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रमुख कार्यक्रमों और पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। उन्होंने मिशन-उन्मुख अनुसंधान, संस्थागत सुधारों और वैज्ञानिक परिणामों को प्रत्यक्ष सामाजिक और आर्थिक महत्व के परिणामों में परिवर्तित करने पर सीएसआईआर के फोकस को रेखांकित किया।
प्रस्तुति का एक प्रमुख आकर्षण एयरोस्पेस से संबंधित परियोजनाएं थीं। डॉ. कलाइसेल्वी ने बताया कि महत्वपूर्ण एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण करने, रणनीतिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने और संवेदनशील डिजाइन और ज्ञान क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए एक मिशन-मोड कार्यक्रम की परिकल्पना की जा रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह योजना उच्च स्तरीय अनुसंधान और विकास को मजबूत करके, नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देकर और रणनीतिक क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता को कम करके देश के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए बनाई गई है। यह विकसित भारत की परिकल्पना के प्रमुख स्तंभ हैं।
केंद्रीय मंत्री महोदय ने सीएसआईआर की विभिन्न पहलों में हुई प्रगति की समीक्षा की और सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अनुसंधान की प्रभावशीलता, प्रासंगिकता और प्रभाव को और बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक कार्यक्रमों का मूल्यांकन और प्रचार-प्रसार वास्तविक दुनिया पर उनके प्रभाव के संदर्भ में किया जाना चाहिए, जिसमें रोजगार सृजन, उद्यमिता, औद्योगिक विस्तार और सामाजिक कल्याण, विशेष रूप से युवाओं के कल्याण में योगदान शामिल है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीएसआईआर के लिए एक विकेंद्रीकृत और सुव्यवस्थित संचार रणनीति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सलाह दी कि देश भर में सीएसआईआर की 37 प्रयोगशालाओं को मीडिया, हितधारकों, उद्योग और स्थानीय समुदायों के साथ सीधे जुड़कर अपनी उपलब्धियों को प्रदर्शित करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ध्यान केवल तकनीकी विवरणों तक सीमित रहने के बजाय, इस बात पर होना चाहिए कि प्रयोगशाला-आधारित नवाचार जमीनी स्तर पर किस प्रकार ठोस लाभ में परिवर्तित हो रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने एक नए दृष्टिकोण की आवश्यकता पर स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी तैनाती, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय प्रभाव से संबंधित सफलता की कहानियों पर अधिक जोर देने का आह्वान किया। ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान के मूल्य को लोगो और नीतिगत हितधारकों द्वारा समान रूप से बेहतर ढंग से समझा जा सके।
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