केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान “समृद्ध दीदी से समृद्ध राष्ट्र| गणतंत्र दिवस सम्मान समारोह, 2026” में “दीदियों” के साथ शामिल हुए
केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान “समृद्ध दीदी से समृद्ध राष्ट्र| गणतंत्र दिवस सम्मान समारोह, 2026” में “दीदियों” के साथ शामिल हुए
केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली के पूसा स्थित ‘भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम‘ में आयोजित “समृद्ध दीदी से समृद्ध राष्ट्र| गणतंत्र दिवस अभिनंदन समारोह, 2026″ कार्यक्रम में देश भर से आईं लखपति दीदियों, पीएमएवाई–जी लाभार्थियों और दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई–एनआरएलएम) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) दीदियों का स्वागत किया और उनके उल्लेखनीय योगदान की प्रशंसा की। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले, श्री शिवराज सिंह चौहान ने डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी के साथ स्वयं सहायता समूह की दीदियों के संग मिलकर पौधारोपण कर इस आयोजन का शुभारंभ किया।

केंद्रीय मंत्री ने ‘विकसित भारत 2047′ के विजन को साकार करने के लिए ग्रामीण आजीविका, सामुदायिक संस्थाओं और समावेशी विकास को सशक्त करने में उनके नेतृत्व और योगदान के सम्मान में 400 से अधिक लखपति दीदियों, पीएमएवाई–जी लाभार्थियों और एसएचजी प्रमुखों को सम्मानित किया।

अपने मुख्य भाषण में, श्री शिवराज सिंह चौहान ने दोहराया कि गणतंत्र दिवस जनता का और स्वयं सहायता समूहों की लखपति दीदियों की प्रेरक यात्राओं का उत्सव है। उन्होंने देश भर से आई एसएचजी महिलाओं का स्वागत किया और उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व और अन्य महिलाओं को सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक समृद्ध राष्ट्र का निर्माण समृद्ध महिलाओं पर टिका है। उन्होंने ऋण प्राप्ति, आजीविका और सामूहिक सशक्तिकरण को सक्षम करने में डीएवाई–एनआरएलएम की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि भारत 2 करोड़ से आगे बढ़ते हुए अब 3 करोड़ लखपति दीदियों के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।

उन्होंने लैंगिक समानता, सामाजिक बदलाव और भेदभावपूर्ण मान्यताओं को चुनौती देने की आवश्यकता पर बल दिया तथा “लाड़ली लक्ष्मी योजना” और “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” जैसी पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने एसएचजी नेटवर्क को सरकारी योजनाओं की अंतिम छोर तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने, आजीविका के विस्तार, जैविक खेती और बाज़ार संपर्क को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि व्यक्तियों को व्यक्तिगत बैंक लिंकेंज उपलब्ध कराने पर केंद्रित प्रयास किए जाएंगे, ताकि उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले। उन्होंने महिलाओं से जमीनी स्तर के राजनीतिक नेतृत्व में अपनी भागीदारी मजबूत करने का भी आह्वान किया। महिलाओं को राष्ट्र–निर्माण में समान भागीदार बताते हुए उन्होंने महिला–नेतृत्व वाले ग्रामीण विकास के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कार्य करने की शपथ दिलाई।

अपने संबोधन में ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि राष्ट्र–निर्माण में महिलाओं की भूमिका केंद्रीय है और महिला सशक्तिकरण एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। गुंटूर में आयोजित सरस मेला के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने एसएचजी महिलाओं के बदलावकारी कार्य और उद्यमशील भावना को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदानकर्ता हैं, जहां हर चार एमएसएमई में से एक महिला–नेतृत्व वाला है। उन्होंने लोकप्रिय ई–कॉमर्स प्लेटफॉर्म सहित बाज़ार संपर्क सृजित करने में डीएवाई–एनआरएलएम की भूमिका पर जोर दिया और बताया कि ग्रामीण महिलाएं तेजी से मूल्य शृंखलाओं में भाग ले रही हैं तथा डिजिटल उपकरणों के माध्यम से बाज़ारों से जुड़ रही हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम संवैधानिक मूल्यों और प्रत्येक महिला की पूर्ण क्षमता को साकार करने की आकांक्षा को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने बताया कि डीएवाई–एनआरएलएम मंचों के माध्यम से एसएचजी महिलाएं बचत और ऋण से आगे बढ़कर आजीविका, नेतृत्व और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ी हैं, और इस बात पर बल दिया कि भारत की प्रगति उसकी दीदियों की प्रगति से जुड़ी है। उन्होंने ग्रामीण भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एसएचजी महिलाओं और उनके जीवनसाथियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान विशेष अतिथि– लखपति दीदियां, पीएमएवाई–जी लाभार्थी और एसएचजी प्रमुखों ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन किया। यह सामूहिक प्रस्तुति भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस गीत के प्रति गहन गर्व, एकता और सम्मान को दर्शाती है, जो आज भी राष्ट्रीय गौरव और सामूहिक संकल्प की भावना से पीढ़ियों को प्रेरित करता है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी के साथ देशभर से आई एसएचजी महिलाओं से संवाद किया और राष्ट्र–निर्माण व ग्रामीण बदलाव में उनकी भूमिका का उत्सव मनाया। दीदियों ने खाद्य प्रसंस्करण, प्रिंटिंग, सौंदर्य सेवाएं, बैंकिंग, कृषि, पशुपालन, बुनाई, खुदरा व्यापार और जेसीबी संचालन जैसे गैर–पारंपरिक उद्यमों सहित विविध क्षेत्रों में अपनी यात्राओं से जुड़े अनुभव साझा किए, जिनमें ऋण तक पहुंच, डिजिटल बैंकिंग, बाज़ार संपर्क और एसएचजी महासंघों में नेतृत्व भूमिकाएं शामिल रहीं। उनकी कहानियां डीएवाई–एनआरएलएम के तहत बढ़ी आय, वित्तीय स्वतंत्रता, सामाजिक गतिशीलता और सामुदायिक नेतृत्व को दर्शाती हैं। विकसित भारत के विज़न की दिशा में ग्रामीण आजीविका, संस्थानों और समावेशी विकास को सुदृढ़ करने में योगदान के लिए लखपति दीदियों, पीएमएवाई–जी लाभार्थियों और एसएचजी नेताओं को पुनः सम्मानित किया गया।

केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर में 199 सामुदायिक प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (सीएमटीसीएस) का उद्घाटन किया। यह उद्घाटन सतत सीखने को बढ़ावा देने, महिलाओं की भागीदारी के विस्तार और जमीनी स्तर पर कौशल विकास को सुदृढ़ करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ये सीएमटीसी ग्रामीण विकास ढांचे के अंतर्गत क्षमता निर्माण, आजीविका संवर्धन और महिला–नेतृत्व वाली सामुदायिक संस्थाओं को और मजबूत करने के लिए समुदाय–नेतृत्व वाले मंच के रूप में कार्य करेंगे।

कार्यक्रम का समापन देशभर से आए विशेष अतिथियों के सम्मान में ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा आयोजित भव्य भोज के साथ उत्सवपूर्ण वातावरण में हुआ।
गणतंत्र दिवस 2026 समारोहों के अंतर्गत, ग्रामीण विकास मंत्रालय रक्षा मंत्रालय के सहयोग से डीएवाई–एनआरएलएम और पीएमएवाई–जी के तहत देश के 400 से अधिक विशेष अतिथियों, जिनमें महिला एसएचजी सदस्य, पीएमएवाई–जी लाभार्थी और अपने जीवनसाथियों के साथ लखपति दीदियां शामिल हैं, की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है।
26 जनवरी 2026 को विशेष अतिथि नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होंगे, इसके बाद 27 जनवरी 2026 को कुतुब मीनार, सुंदर नर्सरी और हुमायूं का मकबरा जैसे विरासत स्थलों का भ्रमण करेंगे। यह कार्यक्रम संवैधानिक मूल्यों के सम्मान और एक समृद्ध, सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प को प्रतिबिंबित करता है।