ओएनजीसी ने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के वित्त पोषित अवसंरचना विकास हेतु राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
ओएनजीसी ने कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के वित्त पोषित अवसंरचना विकास हेतु राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत महारत्न कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड – ओएनजीसी ने आदिवासी युवाओं के कल्याण की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाते हुए, जनजातीय कार्य मंत्रालय के स्वायत्त निकाय राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। इसका उद्देश्य एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) में अवसंरचना विकास और नामांकित आदिवासी छात्रों को शिक्षा, भविष्य के पेशे संबंधी मार्गदर्शन और डिजिटल प्रवीणता प्रदान करना है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय, जनजातीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) संबंधी केंद्रीय योजना संचालित करता है। ये विद्यालय शिक्षा, प्रौद्योगिकी और समग्र विकास द्वारा आधुनिक और प्रबुद्ध पीढ़ी के पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। देश भर में अभी 499 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हैं।


समझौता ज्ञापन पर 5 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम की उप महाप्रबंधक श्रीमती बिस्मिता दास और ओएनजीसी के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व प्रमुख डॉ. देबासिस मुखर्जी के बीच जनजातीय कार्य मंत्रालय सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा, अपर सचिव श्री मनीष ठाकुर, संयुक्त सचिव श्री अनंत प्रकाश पांडे, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम के अध्यक्ष सह-प्रबंध निदेशक श्री टी. रौमुआनपाइते, ओएनजीसी के मानव संसाधन निदेशक श्री मनीष पाटिल और मंत्रालय तथा ओएनजीसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए और दस्तावेजों का आदान प्रदान किया गया।
सीएसआर वित्त पोषित परियोजना का विवरण: ओएनजीसी ने 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (आंध्र प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली, दमन एवं दीव, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) में स्थित 144 आदिवासी शिक्षा संस्थानों में डिजिटल शिक्षण अवसंरचना सुदृढ़ करने, छात्राओं के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी उपाय (सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और भस्मक) लागू करने, शिक्षकों के क्षमता निर्माण और विद्यार्थियों के लिए कैरियर परामर्श एवं उद्यमिता प्रशिक्षण हेतु 28 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस पहल से 35 हजार से अधिक आदिवासी विद्यार्थी समान अवसर लाभ पा सकेंगे।
यह पहल जनजातीय कार्य मंत्रालय और कॉर्पोरेट क्षेत्र के बीच व्यापक सहयोगात्मक प्रयास का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास में सुधार करना है जिससे वे विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ सकें।