एक साल, कई यात्राएं हुईं आसान: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की टोल नीतियां राजमार्ग पर सफर का नया अनुभव करा रही हैं
एक साल, कई यात्राएं हुईं आसान: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की टोल नीतियां राजमार्ग पर सफर का नया अनुभव करा रही हैं
राष्ट्रीय राजमार्गों में अभूतपूर्व वृद्धि के कारण टोल प्लाजों पर लगने वाली लंबी कतारों से आम यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी है। हालांकि, पिछले एक दशक में टोल प्रणाली में महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव हुए हैं, जिससे आवागमन तेज हुआ है और सड़क यात्रियों को काफी सुविधा मिली है। इस रूख को आगे बढ़ाते हुए, वर्ष 2025 में जनहितकारी सुधारों और नवाचारों को लागू किया गया, जिससे राजमार्ग यात्रा और भी सुगम और कुशल हो गई है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने एनएचएआई के साथ मिलकर यात्रियों की असल चिंताओं को कम करने के लिए व्यावहारिक समाधानों पर लगन से काम किया है।
फास्टैग वार्षिक पास
15 अगस्त 2025 को शुरू किए गए फास्टैग वार्षिक पास के साथ, अब यात्रियों को देश भर के 1,159 टोल प्लाजा पर 200 टोल ट्रिप या पूरे एक वर्ष की यात्रा सुविधा, जो भी पहले हो, प्राप्त करने के लिए केवल 3,000 रुपये का भुगतान करना होगा।
उन्नाव के कुशेहरी निवासी ने कहा, “मैंने हाल ही में फास्टैग वार्षिक पास लिया है क्योंकि मैं रोजाना उन्नाव से लखनऊ जाता हूं। पहले मुझे टोल शुल्क के रूप में प्रतिदिन लगभग 90 रुपये खर्च करने पड़ते थे। अब वार्षिक पास लेने के बाद मेरा दैनिक खर्च घटकर सिर्फ 30 रुपये रह गया है। समय की भी बचत होती है क्योंकि मैं टोल प्लाजा को मुश्किल से एक मिनट में पार कर लेता हूं।”
देश के अन्य हिस्सों में भी राजमार्गों का नियमित उपयोग करने वालों को इसी तरह की राहत मिल रही है। कई लोगों के लिए, इस वार्षिक पास ने न केवल दैनिक यात्रा खर्च को कम किया है, बल्कि नियमित आवागमन को तनावमुक्त भी बना दिया है।
हरियाणा में यमुना नगर के एक निवासी ने बताया, “मुझे नियमित रूप से चंडीगढ़ जाना पड़ता है। पहले मुझे आने-जाने के लिए कुल 150 रुपये खर्च करने पड़ते थे। लेकिन वार्षिक पास बनवाने के बाद मेरा खर्च घटकर सिर्फ 30 रुपये रह गया है, जिससे मुझे बहुत राहत मिली है।”
इसके अलावा, फास्टैग वार्षिक पास ने अनिश्चित मासिक टोल खर्चों को एक निश्चित, तनाव-मुक्त लागत में बदल दिया है, जिससे दैनिक यात्रियों को पूरे वर्ष निश्चितता, बचत तथा सुगम यात्रा मिलती है, और उन्हें अपने फास्टैग को लगातार रिचार्ज करने की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती।
महज कुछ महीनों में ही 40 लाख से अधिक फास्टैग वार्षिक पास बिक चुके हैं, और लगभग 20 प्रतिशत कार वालों ने इसे अपना लिया है, जो इस बात का प्रमाण है कि किफायती और सुविधाजनक दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना
टोल प्लाजा पर, कभी नकद भुगतान सबसे धीमा और अव्यवस्थित विकल्प हुआ करता था। लंबी कतारें, खुले पैसे की समस्या और विवाद आम बात थी। इस समस्या को दूर करने के लिए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहले नॉन-फास्टैग भुगतानों पर 2 गुना शुल्क लगाया था, जिससे कुछ वाहन वालों के लिए भुगतान महंगा हो जाता था। अब, यूपीआई भुगतानों के लिए इसे घटाकर केवल 1.25 गुना कर दिया गया है, जिससे यह काफी किफायती हो गया है और नकद का यह एक वास्तविक विकल्प बन गया है। पहले, नकद भुगतान का मतलब इंतजार करना और कभी-कभी बहस होना होता था। आज, यूपीआई भुगतानों पर 2 गुना से 1.25 गुना तक की छूट के साथ, यात्रियों को बस स्कैन करना, भुगतान करना और आगे बढ़ना है – जिससे डिजिटल भुगतान सरल, त्वरित और सार्थक हो गया है।
15 नवंबर से 10 दिसंबर 2025 के बीच टोल प्लाजा पर 15 लाख से अधिक यूपीआई लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल राशि 19.44 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा, नकद वसूली में 25 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे टोल प्लाजा पर भीड़ कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।
वर्तमान में, 98 प्रतिशत वाहन पहले से ही फास्टैग का उपयोग करते हैं, और शेष अंतर न केवल जुर्माने के माध्यम से, बल्कि उपयोगकर्ता के अनुकूल प्रोत्साहनों के माध्यम से भी लगातार कम हो रहा है।
अब रुकने की कोई ज़रूरत नहीं – टोल प्रणाली का नया रूप आ गया है।
टोल प्लाजा पर रुकने और फिर से चलने वाले ट्रक चालक ईंधन की बर्बादी, थकान और देरी से परेशान रहते थे। हर बार रुकने पर डीजल और समय दोनों की खपत होती है और लंबे मार्गों पर तो यह खर्च और भी बढ़ जाता है।
अब इस समस्या का समाधान भारत की पहली बाधा-मुक्त मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है, जिसे गुजरात में एनएच-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा में लागू करने के लिए पहले ही ठेका दिया जा चुका है और इसके 2026 में चालू होने की उम्मीद है। इसके समानांतर, एनएचएआई ने 5 और बाधा-मुक्त टोलिंग प्रणालियों के लिए ठेके दिए हैं, जो आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
एक बार लागू हो जाने के बाद, वाहन राजमार्ग की गति से गुजर सकेंगे, और टोल की कटौती बिना किसी बाधा या कतार के स्वचालित रूप से होगी।
निर्माण के दौरान, यात्रियों को केवल 50 प्रतिशत टोल का भुगतान करना होगा
राजमार्गों के नवीनीकरण से अक्सर असुविधा होती है। इसे ध्यान में रखते हुए, सड़क परिवहन मंत्रालय के अद्यतन नियम के अनुसार, जब किसी सड़क को पक्के शोल्डर वाली दो लेन से चार, छह या उससे अधिक लेन में अपग्रेड किया जा रहा हो, तो काम पूरा होने तक वाहन वालों को पहले के टोल का केवल आधा (50 प्रतिशत) ही भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बहु-लेन विस्तार के दौरान टोल दर 50 रुपये है, तो निर्माण अवधि के दौरान वाहन वालों को केवल 25 रुपये का भुगतान करना होगा। यह स्पष्ट रूप से सड़क की गुणवत्ता में सुधार के प्रति सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करता है कि निर्माण के दौरान यात्रियों से अधिक शुल्क न लिया जाए और यात्रा अधिक किफायती और लोगों के लिए सस्ती बनी रहे।
टोल लागत के अलावा, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने फास्टैग व्यवस्था को निम्नलिखित तरीकों से मजबूत किया है:
देश के राजमार्गों पर गुपचुप बदलाव
ये पहलें शायद हमेशा सुर्खियों में न रहें, लेकिन इनका असर हर दिन महसूस होता है, जैसे कि कतारें छोटी होना, खर्च का अनुमान लगाना, यात्रा का सुगम होना और टोल बूथों पर अधिक सहज अनुभव मिलना।
पिछले एक वर्ष में अपनाए गए दृष्टिकोण से यह स्पष्ट होता है कि सुशासन को जनसुविधा और आर्थिक विकास में से किसी एक को चुनने की आवश्यकता नहीं है। स्मार्ट नीति, डिजिटल उपकरणों और सड़क यात्रियों के प्रति सहानुभूति के साथ, दोनों को प्राप्त करना संभव है।
सड़क पर लगातार यात्रा कर रहे लाखों भारतीयों के लिए, निरंतर सुधार और आराम की दिशा में एक यात्रा शुरू हो चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप जीवन में सुगमता आएगी।