एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना
एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना
वस्त्र उद्योग को आवश्यक पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने में सहायता प्रदान करने और प्रसंस्करण क्लस्टरों/प्रसंस्करण पार्कों में नए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के उन्नयन में सहायता प्रदान करने के लिए, सरकार वर्ष 2013 से एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना (आईपीडीएस) लागू कर रही है। इस योजना का उद्देश्य भारतीय वस्त्र उद्योग को पर्यावरण अनुकूल प्रसंस्करण मानकों और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में सहायता प्रदान करना है। यह योजना मौजूदा वस्त्र क्लस्टरों में प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता वृद्धि के लिए भी लागू होगी। यह योजना 31.03.2021 तक लागू थी और अब, यह योजना केवल चालू परियोजनाओं को पूरा करने के लिए लागू की जा रही है।
इस योजना के अंतर्गत 6 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं जो कार्यान्वयनाधीन हैं। परियोजनाओं का राज्यवार विवरण इस प्रकार है:
क्रम सं.
परियोजना का नाम
राज्य
स्थिति
1
बालोतरा जल प्रदूषण नियंत्रण उपचार एवं रिवर्स ऑस्मोसिस प्राइवेट लिमिटेड
राजस्थान
पूर्णता की ओर अग्रसर
2
जसोल जल प्रदूषण नियंत्रण उपचार और रिवर्स ऑस्मोसिस प्राइवेट लिमिटेड
राजस्थान
पूर्णता की ओर अग्रसर
3
सांगानेर एनवायरो परियोजना विकास
राजस्थान
लागू की जा रही है
4
नेक्स्टजेन टेक्सटाइल पार्क
राजस्थान
लागू की जा रही है
5
पाली कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट
राजस्थान
लागू की जा रही है
6
गुजरात इको टेक्सटाइल पार्क.
गुजरात
पूर्णता की ओर अग्रसर
लंबित परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए 21 नवंबर 2025 को परियोजना अनुमोदन समिति (पीएसी) की बैठक आयोजित की गई, जिसमें परियोजनाओं के समक्ष चुनौतियों और निर्मित बुनियादी ढांचे की स्थिति पर विस्तृत समीक्षा की गई तथा परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश जारी किए गए।
यह जानकारी वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।