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इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निधि

इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निधि

परिचय

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं, जो कई सरकारी पहलकदमियों और उद्योग से संबंधित सुधारों के कारण संभव हुआ है। देश इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन और विनिर्माण के एक वैश्विक केंद्र के रूप में तेज़ी से उभर रहा है जहां तेज़ी से तकनीकी परिवर्तन और नवाचार हो रहे हैं।

इस गति को बनाये रखने और मज़बूत नवाचार संबंधी इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए भारत सरकार ने 15 फ़रवरी 2016 को इलेक्ट्रॉनिक्स विकास कोष (ईडीएफ) की शुरुआत की। इस कोष का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स, नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान, विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

ईडीएफ एक फंड ऑफ फंड्स के रूप में कार्य करता है, जिसे पेशेवर रूप से प्रबंधित डॉटर फंड्स, जैसे कि शुरुआती चरण के एंजेल और वेंचर फंड्स, में निवेश करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके बदले में, ये डॉटर फंड्स स्टार्टअप्स और नई तकनीकें विकसित करने वाली कंपनियों को जोखिम पूंजी प्रदान करते हैं। ऐसा करके, ईडीएफ ने एक आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जो देश के भीतर नवाचार, उत्पाद डिजाइन और बौद्धिक संपदा निर्माण को प्रोत्साहित करता है।

लक्ष्य और रणनीतिक उद्देश्य

ईडीएफ की स्थापना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवाचार और अनुसंधान के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करने के उद्देश्य से की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे फंडों का समर्थन करके इकोसिस्टम को मज़बूत करना है जो स्टार्टअप्स और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास में लगी कंपनियों को जोखिम पूंजी प्रदान करते हैं।

प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:

फंड की प्रमुख परिचालन विशेषताएं

इलेक्ट्रॉनिक्स विकास कोष (ईडीएफ) एक लचीले और पेशेवर रूप से प्रबंधित ढांचे के माध्यम से संचालित होता है,जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों में कुशल निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका ढांचा पारदर्शिता बाज़ार की जवाबदेही और निधियों के रणनीतिक आवंटन को सुनिश्चित करता है।

Text Box: परिचालन ढांचे पर एक नज़रएंकर निवेशक: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), भारत सरकारट्रस्टी और सेटलर/प्रायोजक: केनरा बैंक, एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का बैंकनिवेश प्रबंधक: कैनबैंक वेंचर कैपिटल फंड्स लिमिटेड ( सीवीसीएफएल)- केनरा बैंक की 100 प्रतिशत स्वामित्व वाली सहायक कंपनी।

इस योजना से जुड़े हर डॉटर फंड का भारत में पंजीकृत होना आवश्यक है और इसे सभी लागू नियम कानून मानना होगा जिसमें सेबी के वैकल्पिक निवेश फंड के श्रेणी 1 और श्रेणी 2 के नियम भी शामिल हैं।

इससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी सहभागी निधियां एक सुपरिभाषित नियामक ढांचे के अंतर्गत काम करें और साथ ही ईडीएफ के अनुसंधान, उद्यमिता और तकनीकी उन्नति को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप कार्य करें।

मुख्य विशेषताएं:

 

उपलब्धियाँ और प्रभाव

इलेक्ट्रॉनिक्स विकास कोष (ईडीएफ) ने भारत के नवाचार इकोसिस्टम को संवर्द्धित करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। ईडीएफ ने अपने योगदानकर्ताओं से कुल 216.33 रुपये करोड़ प्राप्त किए हैं,जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से प्राप्त 210.33 करोड़ रुपये  शामिल हैं।

समर्थित स्टार्टअप इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), रोबोटिक्स, ड्रोन, स्वयंचालित वाहन,स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग जैसे अग्रणी क्षेत्रों में काम करते हैं जो भारत को एक उन्नत तकनीकी नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

क्रम संख्या:

डॉटर फंड का नाम

ईडीएफ द्वारा निवेश राशि (करोड़ रुपये)

डॉटर फंड निवेश (करोड़ रुपये)

वित्तपोषित स्टार्टअप्स की कुल संख्या

1

यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स ट्रस्ट

15.82

63.64

17

2

आरुहा टेक्नोलॉजी फंड – 1                          

6.75

26.22

13

3

एंडिया सीड को-क्रिएशन फंड                        

30.00

137.03

12

4

करसेमवेन फंड                                          

24.00

83.43

17

5

पाई वेंचर्स फंड 1                                          

15.00

186.53

15

6

योरनेस्ट इंडिया वीसी फंड II            

43.15

185.54

19

7

वेंचरईस्ट प्रोएक्टिव फंड – II            

97.75

425.7

18

8

एक्सफिनिटी टेक्नोलॉजी फंड सीरीज II 

25.30

227.68

17

कुल                                                            

257.77

1335.77

128

 

30 सितंबर 2025 तक:

निष्कर्ष

इलेक्ट्रॉनिक्स विकास कोष ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी क्षेत्रों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जोखिम पूंजी तक पहुँच को सक्षम बनाकर, इसने उन्नत तकनीकों पर काम कर रहे स्टार्टअप्स को समर्थन दिया है और घरेलू डिज़ाइन और बौद्धिक संपदा सृजन के विस्तार में योगदान दिया है। कोष के पारदर्शी और पेशेवर रूप से प्रबंधित ढांचे ने निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ाने और देश में एक जीवंत,आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र की नींव को मजबूत करने में मदद की है।

संदर्भ:

MEITY:

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