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इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, इंडियाएआई, असम सरकार और आईआईटी गुवाहाटी ने मानव संसाधन कार्य समूह की बैठक की मेजबानी की

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, इंडियाएआई, असम सरकार और आईआईटी गुवाहाटी ने मानव संसाधन कार्य समूह की बैठक की मेजबानी की

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, इंडिया एआई मिशन, असम सरकार और आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी गुवाहाटी परिसर में “मानव पूंजी” विषय पर दो दिवसीय कार्य समूह की बैठक का आयोजन कर रहे हैं। इस बैठक में वरिष्ठ नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और विशेषज्ञों को शिक्षा सुधार, कार्यबल परिवर्तन और समावेशी, मानव-केंद्रित एआई अपनाने पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया गया। प्रो. टी.जी. सीताराम की अध्यक्षता में आयोजित दो दिन की बैठक (5-6 जनवरी 2026) नई दिल्ली में 15-20 फरवरी 2026 को होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए एक महत्वपूर्ण विषयगत पूर्वाभ्यास के रूप में कार्य करती है और इससे राष्ट्रीय स्तर के विचार-विमर्श और नीतिगत परिणामों को दिशा मिलने की उम्मीद है।

उद्घाटन सत्र में असम सरकार के विशेष मुख्य सचिव श्री सैयदैन अब्बासी, आईएएस, असम सरकार के प्रधान सचिव (आईटी) श्री के.एस. गोपीनाथ नारायण, आईएएएस, मानव संसाधन कार्य समूह के अध्यक्ष प्रो. टी.जी. सीताराम,आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक प्रो. देवेंद्र जलिहाल और भारत एआई, मीतिवाई की संयुक्त निदेशक सुश्री शिखा दहिया ने संबोधित किया। वक्ताओं ने भारत की एआई यात्रा में मानव संसाधन की केंद्रीयता को रेखांकित किया और आजीवन सीखने, संवर्धन और संस्थागत तत्परता की दिशा में पारंपरिक कौशल विकास मॉडल से आगे बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

 आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक प्रोफेसर देवेंद्र जलिहाल ने सभा का स्वागत करते हुए एआई के युग में भविष्य के लिए तैयार मानव संसाधन को आकार देने के लिए नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, उद्योग और छात्रों के लिए एक मंच के रूप में संस्थान की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने प्रौद्योगिकी, शिक्षा और समाज के अंतर्संबंधों पर काम करने के लिए आईआईटी गुवाहाटी की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और समावेशी एआई इकोसिस्टम में बढ़ती रुचि के प्रतिबिंब के रूप में छात्रों की मजबूत भागीदारी का उल्लेख किया।

एम ई आई टी वाई में इंडियाएआई की संयुक्त निदेशक सुश्री शिखा दहिया ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के विज़न की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मानव संसाधन, एआई संसाधनों के लोकतंत्रीकरण और समावेशी एवं ज़िम्मेदार एआई अपनाने पर इसके फोकस को रेखांकित किया। विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए। उन्होंने कंप्यूट क्षमता, स्वदेशी डेटासेट और मॉडल, तथा राष्ट्रव्यापी एआई कौशल विकास और क्षमता निर्माण प्रयासों से संबंधित पहलों के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार मानव संसाधन के निर्माण में इंडियाएआई मिशन की भूमिका पर बल दिया और कहा कि गुवाहाटी में हुई चर्चाओं के परिणाम शिखर सम्मेलन में वैश्विक स्तर की चर्चाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे।

मानव संसाधन कार्य समूह के अध्यक्ष प्रोफेसर टीजी सीताराम ने कहा कि एआई-सक्षम अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण समावेशी और जन-केंद्रित होना चाहिए, जिसमें मानव पूंजी मूल में हो। उन्होंने कौशल विकास के खंडित प्रयासों से आगे बढ़कर आजीवन सीखने की ऐसी प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया जो तकनीकी कौशल के साथ-साथ अनुकूलनशीलता, विवेकशीलता और मानव-केंद्रित क्षमताओं को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का अंतिम परिणाम गरिमा, अवसर और लचीलापन होना चाहिए।

असम सरकार के प्रधान सचिव (आईटी) श्री के.एस. गोपीनाथ नारायण, आईएएएस ने कहा  कि ए आई का एकीकरण अर्थव्यवस्थाओं और समाजों के कामकाज में एक मौलिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। इसका मानव संसाधन पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने स्वचालन की तुलना में मानव संवर्धन को प्राथमिकता देने के महत्व पर बल दिया और चेतावनी दी कि अनियंत्रित तकनीकी परिवर्तन विभिन्न क्षेत्रों और प्रदेशों में असमानताओं को बढ़ा सकता है। उन्होंने निरंतर सीखने, सूक्ष्म कौशल विकास और एआई साक्षरता को आवश्यक सार्वजनिक क्षमताओं के रूप में रेखांकित किया।

असम सरकार के विशेष मुख्य सचिव, आईएएस श्री सैयदैन अब्बासी ने कहा कि हालांकि एआई का क्रेज अतीत के तकनीकी चक्रों को दर्शाता है, लेकिन वर्तमान स्थिति मौलिक रूप से भिन्न है क्योंकि एआई तेजी से एक स्वायत्त एजेंट के रूप में कार्य कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ वैश्विक खिलाड़ियों के हाथों में एआई क्षमताओं का केंद्रीकरण असमानताओं को बढ़ा सकता है और भारत के पारंपरिक आईटी और आउटसोर्सिंग आधारित रोजगार मॉडल को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने स्वदेशी कंप्यूटिंग क्षमता, मजबूत सार्वजनिक-निजी सहयोग और शिक्षा के सभी स्तरों पर कौशल विकास के लिए अलग रास्ते अपनाने का आह्वान किया।

उद्घाटन सत्र का समापन असम सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक श्री अश्वनी कुमार, आईएएस द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मानव पूंजी कार्य समूह को उसके विचार नेतृत्व के लिए और आईआईटी गुवाहाटी को अनुसंधान, नीति और वास्तविक दुनिया के प्रभाव को जोड़ने वाले अकादमिक मंच प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय एआई एजेंडा को आगे बढ़ाने में निरंतर सहयोग के लिए इंडियाएआई मिशन की सराहना की।

सुश्री शिखा दहिया ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का एक संक्षिप्त विवरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने इसके बहु-दिवसीय कार्यक्रम के बारे बताया और कहा इसका समापन नई दिल्ली में नेताओं के पूर्ण सत्रों और कार्य समूह के परिणामों के साथ होगा। इसमें एआई संसाधनों के लोकतंत्रीकरण, स्वदेशी मॉडलों को सक्षम बनाने और वैश्विक दक्षिण के दृष्टिकोणों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

प्रथम दिन का एक प्रमुख आकर्षण आईआईटी गुवाहाटी के पूर्व निदेशक प्रोफेसर गौतम बरुआ का “एआई युग में दक्षता का लोकतंत्रीकरण” विषय पर दिया गया मुख्य भाषण था । इसमें उन्होंने व्यक्तिगत विशेषज्ञों को तैयार करने के लिए डिज़ाइन की गई शिक्षा प्रणालियों से हटकर ऐसे मॉडलों की ओर संरचनात्मक बदलाव का विश्लेषण किया जो डोमेन-विशिष्ट एआई उपकरणों के माध्यम से बड़े पैमाने पर मानव संवर्धन को सक्षम बनाते हैं। इसमे क्षेत्र-संरेखित एआई प्रणालियों के महत्व पर बल दिया गया जो बुनियादी मानवीय क्षमता को बढ़ाते हुए स्वचालन से प्रभावित श्रमिकों के लिए संक्रमणकालीन सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण सुनिश्चित करती हैं।

इसके बाद ” एआई संक्रमण के लिए लिंग-संवेदनशील रणनीतियाँ” विषय पर एक पैनल चर्चा हुई। इसमें कार्यबल में महिलाओं पर एआई के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। चर्चा में प्रवेश स्तर की भूमिकाओं के स्वचालन, बढ़ते वेतन अंतर, डेटा और एल्गोरिथम पूर्वाग्रह, और एआई कौशल तक असमान पहुँच से संबंधित जोखिमों को रेखांकित किया गया। साथ ही समावेशी डिज़ाइन, व्याख्या योग्य एआई, अपनाने पर आधारित पुनर्कौशल और इकोसिस्टम -संचालित नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि न्यायसंगत और जन-केंद्रित एआई संक्रमण सुनिश्चित किया जा सके। द एशिया ग्रुप की एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट सुश्री अर्पिता देसाई द्वारा संचालित इस पैनल में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की वैज्ञानिक-जी सुश्री तुलिका पांडे (वर्चुअल रूप से); ईक्लर्क्स के एआई प्रमुख श्री संजय कुकरेजा; सेल्सफोर्स की लोक नीति और सरकारी मामलों की प्रबंधक सुश्री उर्मी टैट; आईसीआरआईईआर की वरिष्ठ फेलो डॉ. तनु एम. गोयल प्रोफेसर ध्रुब कुमार भट्टाचार्य, कुलपति, तेजपुर विश्वविद्यालय; और प्रोफेसर रत्नजीत भट्टाचार्जी, प्रमुख, एमएफएसडीएस और एआई और प्रमुख, एमसीईएनएसएसआर, आईआईटी गुवाहाटी शामिल हुई। ।

दिन की शुरुआत “संज्ञानात्मक युग के लिए शिक्षा को पुनर्परिभाषित करना” विषय पर एक पैनल चर्चा से हुई। इसमें यह विश्लेषण किया गया कि एआई किस प्रकार अधिगम उद्देश्यों, शिक्षण विधियों और मूल्यांकन प्रणालियों को नया आकार दे रहा है। पैनलिस्टों ने रटने पर आधारित शिक्षण से संज्ञानात्मक, प्रक्रिया-उन्मुख अधिगम की ओर बदलाव; शिक्षकों पर प्रशासनिक बोझ कम करते हुए शिक्षा को वैयक्तिकृत करने में एआई की भूमिका; समुदाय-परीक्षित, मानव-केंद्रित एआई उपकरणों की आवश्यकता; और शिक्षा प्रणालियों तथा तेजी से विकसित हो रही उद्योग कौशल आवश्यकताओं के बीच घनिष्ठ समन्वय पर चर्चा की। इसमें अनुकूलनशीलता, आलोचनात्मक सोच, सहयोग और आजीवन अधिगम को एआई युग की मुख्य क्षमताओं के रूप में रेखांकित किया गया। द एशिया ग्रुप के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री सुभोदीप जश द्वारा संचालित इस पैनल चर्चा में कॉन्वजेनियस के मुख्य अधिकारी और अध्यक्ष श्री वेंकटेश रेड्डी मल्लापु रेड्डी; रॉकेट लर्निंग के सह-संस्थापक श्री सिद्धांत सचदेवा; किंड्रिल के सरकारी मामलों के उपाध्यक्ष श्री परमिंदर सिंह काकरिया; और एनआईटी दुर्गापुर के पूर्व निदेशक प्रो. अनुपम बसु और प्रोफेसर श्यामंता एम. हजारिका, प्रमुख, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आईआईटी गुवाहाटी शामिल हुए।

आईआईटी गुवाहाटी में मानव पूंजी कार्य समूह की बैठक कल भी जारी रहेगी। इसमें शिक्षा सुधार, कार्यबल परिवर्तन, आजीवन अधिगम प्रणाली और एआई युग के लिए लैंगिक समानता को ध्यान में रखते हुए रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इस बैठक का समापन राष्ट्रीय नीतिगत परिणामों को सूचित करने के लिए प्रमुख अनुशंसाओं के समेकन के साथ होगा। नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एक विषयगत पूर्वाभ्यास के रूप में, गुवाहाटी में आयोजित यह बैठक इंडिया एआई मिशन के तहत समावेशी, मानव-केंद्रित एआई इकोसिस्टम के निर्माण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है, जो क्षेत्रीय दृष्टिकोणों को विकसित भारत 2047 के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करती है।

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