Thursday, January 8, 2026
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इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025 ने संपूर्ण मेडटेक इकोसिस्टम का प्रदर्शन किया, जिससे वैश्विक मेडटेक नवाचार केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत हुई

इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025 ने संपूर्ण मेडटेक इकोसिस्टम का प्रदर्शन किया, जिससे वैश्विक मेडटेक नवाचार केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत हुई

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग की वर्ष 2025 के दौरान की प्रमुख पहलें और उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

इसे फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) के माध्यम से कार्यान्वित किया गया है। अब तक कुल 17,610 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं, जिनमें से 2202 केंद्र 2025 में खोले गए। पीएमबीजेपी की उत्पाद सूची में 2110 दवाएं, 315 चिकित्सा उपकरण और उपभोग्य वस्तुएं शामिल हैं, जो 29 चिकित्सीय समूहों को कवर करती हैं, जैसे कि संक्रमणरोधी, मधुमेहरोधी, हृदय रोगरोधी, कैंसररोधी, पाचन संबंधी दवाएं आदि।

जन औषधि सुविधा सैनिटरी नैपकिन 1 रुपये प्रति पैड की दर से जेएकेएस के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। अब तक 96.30 करोड़ से अधिक सुविधा सैनिटरी पैड बेचे जा चुके हैं, जिनमें से 17.90 करोड़ से अधिक पैड 2025 में बेचे गए।

वर्ष 2024-25 में पीएमबीआई ने 2022.47 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की, जिससे नागरिकों को लगभग 8000 करोड़ रुपये की बचत हुई। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 30.11.2025 तक पीएमबीआई ने 1409.32 करोड़ रुपये की बिक्री की है, जिससे नागरिकों को लगभग 5637 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

प्रगति रिपोर्ट (दिनांक 30.11.2025 तक)

वित्तीय वर्ष

चालू जेएके की संख्या

एमआरपी मूल्य पर बिक्री (करोड़ रुपये में)

वार्षिक वृद्धि

संचयी

2024-25

4142

15,403

2022.47

2025-26

2207

17,610

1409.32

नई पहलें:

 

 

2. थोक दवाओं के लिए आयात पर निर्भरता कम करना:

3. फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत की विनिर्माण क्षमताओं और निर्यात को बढ़ाना:

4. औषधि उद्योग को सुदृढ़ करने की योजना (एसपीआई):

केंद्रीय क्षेत्र योजना औषधीय उद्योग को सुदृढ़ बनाना (एसपीआई) में निम्नलिखित उप-योजनाएं शामिल हैं:

(i) साझा सुविधाओं के लिए फार्मास्युटिकल उद्योग को सहायता (एपीआई-सीएफ): मौजूदा फार्मास्युटिकल क्लस्टरों की सतत वृद्धि के लिए साझा सुविधाएं बनाकर उनकी क्षमता को मजबूत करना। इस योजना के तहत नवंबर 2025 तक 8 परियोजनाओं को अंतिम स्वीकृति दी गई।

(ii) संशोधित फार्मास्युटिकल टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन सहायता योजना (आरपीटीयूएएस): इस योजना के अंतर्गत 30.11.2025 तक 433 पंजीकरण किए गए और 380 आवेदन प्राप्त हुए। इन 380 आवेदनों में से योजना संचालन समिति ने 192 आवेदनों को मंजूरी दी, जिनमें वित्त वर्ष 2025-26 के 167 आवेदन शामिल हैं।

(iii) फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइसेस प्रमोशन और डेवलपमेंट स्कीम (पीएमपीडीएस): इसके अंतर्गत नवंबर 2025 तक 63 कार्यक्रम/कार्यशालाएं/सेमिनार/वेबिनार और 24 अध्ययन किए जा चुके हैं।

5. थोक औषधि पार्कों को बढ़ावा देने की योजना:

इस योजना के तहत विभाग को 13 राज्यों से प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मूल्यांकन के बाद गुजरात, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। चयनित प्रत्येक राज्य के लिए 1000 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है। तीनों चयनित पार्कों में निर्माण कार्य प्रगति पर है। चयनित बल्क ड्रग पार्कों में जारी और उपयोग की गई धनराशि की स्थिति इस प्रकार है:

राज्य

कुल परियोजना लागत

(करोड़ रुपये में)

कुल

सीआईएफ लागत

(करोड़ रुपये में)

केंद्र सरकार द्वारा जारी अनुदान ( करोड़ रुपये में )

राज्य द्वारा जारी की गई निधि

(करोड़ रुपये में )

 

नवंबर 2025 तक उपयोग की गई धनराशि, जिसमें राज्य का हिस्सा भी शामिल है ( करोड़ रुपये में )

गुजरात

2507.02

1457.01

600.00

137.10

427.92

हिमाचल प्रदेश

1923

1118.46

225.00

35.54

50.76

आंध्र प्रदेश

1876.66

1438.89

225.00

132.30

268.75

 

6. चिकित्सा उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना:

इस योजना का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करना है।

इस योजना के अंतर्गत उत्पादों को निम्नलिखित चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

इस योजना के तहत आवेदकों द्वारा की गई कुल बिक्री 12,344.37 करोड़ रुपये है (जिसमें 5,869.36 करोड़ रुपये का निर्यात शामिल है), जो सितंबर 2025 तक हुई है।

7. कॉमन फैसिलिटीज फॉर मेडिकल डिवाइसेस क्लस्टर्स (सीएफएमडीसी) योजना मौजूदा और नए मेडिकल डिवाइस क्लस्टर्स को मजबूत करने के लिए कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटीज के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने और अधिक मेडिकल डिवाइस टेस्टिंग लैबोरेटरीज की उपलब्धता में सुधार करने के लिए है।

विवरण

संख्‍या

अनुदान सहायता (करोड़ रुपये)

सैद्धांतिक स्वीकृति

10

90.92

अंतिम स्वीकृति

7

40.72

अदायगी

7

10.18

अगले एसएससी में स्वीकृत किए जाने वाले 2 मामलों के प्रस्‍तावों को अंतिम मंजूरी मिल गई है।

2

31.71

योजना के अंतर्गत उपलब्ध शेष राशि

37.57

 

8. इंडिया मेडटेक एक्सपो 2025

भारत मेडटेक एक्सपो 2025, चिकित्सा उपकरण क्षेत्र पर दूसरी अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी, जिसका विषय था वैश्विक मेडटेक विनिर्माण केंद्र: सटीक इंजीनियरिंग फिर भी किफायती भारत को वैश्विक मेडटेक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से, 4 से 6 सितंबर 2025 तक भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने किया तथा रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग (डीओपी) के सचिव श्री अमित अग्रवाल ने संबोधित किया।

इसमें भारत के संपूर्ण मेडटेक इकोसिस्टम को प्रदर्शित किया गया, जिसमें स्टार्टअप्स, फ्यूचर पवेलियन, आर एंड डी पवेलियन, एमएसएमई, बड़े उद्यम, अनुसंधान एवं विकास संस्थान, अस्पताल और अकादमिक संस्थान शामिल थे। इसने वैश्विक सहयोग, प्रौद्योगिकी नवाचार और निवेश के लिए उत्प्रेरक का काम किया, जो भारत को वैश्विक मेडटेक हब के रूप में स्थापित करने के भारत सरकार के विजन 2047 के अनुरूप था।

इस आयोजन में विभिन्न हितधारकों की सशक्त भागीदारी देखने को मिली, जिसमें तीन दिनों में कुल 12,106 आगंतुक आए और 2,980 बिजनेस टू बिजनेस (बी2बी) खरीदार-विक्रेता बैठकें हुईं, जो उद्योग की मजबूत सहभागिता और निर्यात क्षमता को दर्शाती हैं। प्रदर्शनी में 65 भारतीय और वैश्विक कंपनियों, स्टार्टअप्स और अकादमिक प्रयोगशालाओं ने भाग लिया, साथ ही स्टेट पवेलियन, आर एंड डी पवेलियन, स्टार्टअप पवेलियन और फ्यूचर पवेलियन सहित समर्पित पवेलियनों में 74 लाइव और डिजिटल प्रदर्शनियाँ आयोजित की गईं। एक अंतर्राष्ट्रीय खरीदार-विक्रेता सम्मेलन ने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत किया।

9. चिकित्सा उपकरण उद्योग सुदृढ़ीकरण (एसएमडीआई) योजना:

(i) चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में क्षमता निर्माण और कौशल विकास योजना (100 करोड़ रुपये)

इस उप-योजना का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान में मौजूद कमियों को दूर करना तथा चिकित्सा प्रौद्योगिकी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, प्रशिक्षण और उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है, ताकि तेजी से विकसित हो रहे बहु-विषयक चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सके और साथ ही इस क्षेत्र के लिए अनुसंधान एवं विकास इको-सिस्‍टम को सुगम बनाया जा सके। इस उप-योजना के अंतर्गत घटक-ए के लिए 13 प्रस्तावों और घटक-बी के लिए 5 प्रस्तावों को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। मास्टर्स प्रोग्राम के लिए कंपोनेंट ए और सर्टिफिकेट/पीजी डिप्लोमा के लिए कंपोनेंट बी के तहत प्रस्तावों का कार्यान्वयन शुरू हो गया है और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों का नामांकन पूरा हो चुका है। स्वीकृत कार्यक्रमों के तहत कुल 750 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं।

(ii) आयात निर्भरता कम करने हेतु सीमांत निवेश योजना (180 करोड़ रुपये)

इस उप-योजना का उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों, जिनमें इन-विट्रो डायग्नोस्टिक उपकरण भी शामिल हैं, के निर्माण में उपयोग होने वाले प्रमुख घटकों, कच्चे माल और सहायक उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसका लक्ष्य भारतीय चिकित्सा उपकरण निर्माताओं की आयातित प्रमुख घटकों और कच्चे माल पर निर्भरता को कम करना और हमारी मूल्य श्रृंखलाओं की गहराई को बढ़ाना है। इस योजना के तहत कुल 15 आवेदकों को लगभग 88 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। उप-योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया 10.12.2025 से 10.1.2026 तक पुनः खोल दी गई है और नए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

(iii) चिकित्सा उपकरण नैदानिक ​​अध्ययन सहायता योजना (100 करोड़ रुपये)

इस उप-योजना का उद्देश्य चिकित्सा उपकरण उद्योग को नैदानिक ​​प्रमाणों पर आधारित उपकरणों के विकास को बढ़ावा देकर और भारत में निर्मित उपकरणों की सुरक्षा और प्रभावकारिता को प्रदर्शित करने वाले नैदानिक ​​डेटा के सृजन द्वारा सहायता प्रदान करना है। एसएससी द्वारा सैद्धांतिक स्वीकृति के लिए कुल 18 प्रस्तावों पर विचार किया गया है। उप-योजना के लिए आवेदन विंडो 10.12.2025 से 10.1.2026 तक पुनः खोल दी गई है और नए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

2024-25 के दौरान दवा क्षेत्र (दवाओं और चिकित्सा उपकरणों दोनों में) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह 12,753 करोड़ रुपये रहा। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल 2025 से सितंबर 2025 तक एफडीआई प्रवाह (दवाओं और चिकित्सा उपकरणों दोनों में) 13,193 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में यह 8,103 करोड़ रुपये था।

11. भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग और नीदरलैंड के स्वास्थ्य, कल्याण एवं खेल मंत्रालय के बीच औषधि एवं चिकित्सा उपकरण उत्पादों के क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन पर 19 जून, 2025 को हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता ज्ञापन फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरण उत्पादों के क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित है, जिसे एक संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा।

12. राष्ट्रीय औषध शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर):

7 एनआईपीईआर के प्रमुख बिंदु/उपलब्धियां:

एनआईपीईआर अहमदाबाद

एनआईपीईआर गुवाहाटी

एनआईपीईआर हाजीपुर

एनआईपीईआर हैदराबाद

एनआईपीईआर कोलकाता

एनआईपीईआर मोहाली

एनआईपीईआर रायबरेली

13. फार्मा मेडटेक सेक्टर में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की योजना (पीआरआईपी)

  1. प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)

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