Wednesday, January 28, 2026
Latest:
Current Affairs

आदि संस्कृति डिजिटल प्लेटफार्म

आदि संस्कृति डिजिटल प्लेटफार्म

लोकसभा में आज एक गैरतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने सूचित किया कि जनजातीय कला रूपों और विरासत के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्मआदि संस्कृतिका बीटा संस्करण 10 सितंबर 2025 को लॉन्च किया गया था।

आदि संस्कृति डिजिटल प्लेटफॉर्म परआदि हाटनामक एक ऑनलाइन बाज़ार की सुविधा उपलब्ध है, जो भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड के ऑनलाइन विपणन प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत होकर जनजातीय कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए बाज़ार संपर्क स्थापित करता है। बाज़ार विकासकर्ता और सेवा प्रदाता के रूप में, भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड जनजातीय आबादी को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में विपणन की संभावनाओं का पता लगाने, जनजातीय उत्पादों के स्थायी विपणन के अवसर पैदा करने और एक ब्रांड बनाने में सहायता करता है।

आदि संस्कृति परियोजना, जो जनजातीय कला रूपों के लिए एक डिजिटल शिक्षण मंच है, वर्तमान में (पहले चरण में) अपने आदि विश्वविद्यालय अनुभाग के अंतर्गत विभिन्न जनजातीय कला रूपों पर 45 गहन पाठ्यक्रम प्रदान करती है, साथ ही आदि संपदा के अंतर्गत संरक्षित सामाजिकसांस्कृतिक जनजातीय विरासत पर लगभग 3,000 संकलित दस्तावेज़ भी उपलब्ध कराती है। इन संसाधनों का उद्देश्य भारत की जनजातीय ज्ञान प्रणालियों की सुरक्षा, शिक्षण और प्रचार के लिए एक व्यापक मंच तैयार करना है। इस मंच का मुख्य उद्देश्य जनजातीय कला रूपों और सामाजिकसांस्कृतिक प्रथाओं का डिजिटल मानचित्रण, संग्रह और संरक्षण करना, कुशल कारीगरों के सहयोग से जनजातीय और आम जनता के लिए सुलभ शिक्षण प्रदान करने हेतु एक आधुनिक, अंतःक्रियात्मक डिजिटल अकादमी बनाना, जनजातीय कलाकारों और कारीगरों के लिए निष्पक्ष व्यापार और प्रत्यक्ष बाजार संपर्क स्थापित करना और गहन अनुभवों और डिजिटल पहुंच के माध्यम से भारत की जनजातीय विविधता को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रदर्शित करना है। दूसरे चरण में, आदि संस्कृति का नाम बदलकर जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा विकसित एक लर्निंग प्लेटफॉर्मट्राइबलएक्सरखने का प्रस्ताव है। परियोजना को लागू करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

ट्राइबलएक्सएक लर्निंग प्लेटफॉर्मअभी विकास के चरण में है और इसमें अन्य कला विधाओं को भी जोड़ा जा रहा है। परियोजना के लिए कुल ₹246,12,763.32 की राशि स्वीकृत की गई है। आज तक, स्वीकृत राशि में से ₹65,83,919 खर्च किए जा चुके हैं।

आगंतुक पटल : 73