आईडब्ल्यूडीसी 3.0 भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के अगले चरण की रूपरेखा तैयार करेगा
आईडब्ल्यूडीसी 3.0 भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के अगले चरण की रूपरेखा तैयार करेगा
अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी) की तीसरी बैठक 23 जनवरी, 2026 को कोच्चि, केरल में आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य अंतर्देशीय जल परिवहन (आईडब्ल्यूटी) क्षेत्र की उपलब्धियों को उजागर करना और इसके भविष्य के दृष्टिकोण की रूपरेखा तैयार करना है।
दिनभर चलने वाले इस सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री श्री सरबानंदा सोनोवाल करेंगे और इसमें बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग राज्य मंत्री श्री शांतनु ठाकुर के साथ-साथ विभिन्न राज्य सरकारों के मंत्री भी उपस्थित होंगे।
बैठक के दौरान, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री विभिन्न राज्यों में अंतर्देशीय जल परिवहन को और विकसित करने के लिए नई पहलों का शुभारंभ करेंगे। अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजनाओं के लिए केंद्र-राज्य सहयोग को मजबूत करने हेतु कई राज्य सहायता समझौतों पर हस्ताक्षर होने की भी उम्मीद है।
आईडब्ल्यूडीसी 3.0 के एजेंडे में एक सुदृढ़ शहरी जल परिवहन प्रणाली का निर्माण, माल परिवहन की दक्षता बढ़ाना, यात्री परिवहन के लिए हरित जलयानों को बढ़ावा देना, नदी क्रूज पर्यटन को आगे बढ़ाना और डिजिटल एवं टिकाऊ प्रथाओं को लागू करने पर सत्र शामिल हैं। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए नियामक ढांचे की समीक्षा भी की जाएगी और राज्यों द्वारा चल रही और प्रस्तावित अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजनाओं से संबंधित उठाई गई चिंताओं का समाधान किया जाएगा।
भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों का एक व्यापक जाल है, जिसके माध्यम से प्रतिवर्ष 14 करोड़ टन से अधिक माल का परिवहन होता है। यह ईंधन-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का एक साधन है। अंतर्देशीय जलमार्ग रेल और सड़क नेटवर्क पर बढ़ते दबाव को कम करते हैं और रोल-ऑन-रोल-ऑफ (रो-रो) वाहन परिवहन और नदी क्रूज पर्यटन जैसी पहलों को सुगम बनाते हैं। 23 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में फैले कुल 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 32 वर्तमान में माल और यात्री परिवहन के लिए कार्यरत हैं। बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) इन जलमार्गों के विकास, रखरखाव और विनियमन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है।
राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2013-14 में 18 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.84 मिलियन टन हो गया है, जबकि यात्री यातायात 2024-25 में बढ़कर 7.64 करोड़ हो गया है। ‘जलवाहक‘ कार्गो प्रोत्साहन योजना जैसी परिवर्तनकारी पहलों के माध्यम से इस गति को और भी बल मिला है, जो माल ढुलाई करने वालों को सड़क और रेल मार्ग से जलमार्गों पर माल स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित करती है, और ‘जल समृद्धि‘ योजना, जो टर्मिनल विकास और संचालन में मजबूत निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देती है।
“माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, अंतर्देशीय जलमार्ग परिषद (आईडब्ल्यूडीसी) एक सच्चा सहयोगात्मक राष्ट्रीय मंच बन गया है, जो नीति निर्माताओं और विभिन्न राज्य सरकारों तथा संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों को अंतर्देशीय जलमार्गों को आकार देने के लिए एक साथ लाता है। माननीय केंद्रीय मंत्री श्री सरबानंदा सोनोवाल ने आईडब्ल्यूडीसी को केंद्र-राज्य प्राथमिकताओं को संरेखित करने, नीतिगत इरादों को कार्रवाई योग्य परिणामों में बदलने और एक हरित, अधिक कुशल परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में रूपांतरित किया है। आईडब्ल्यूएआई के अध्यक्ष सुनील पालीवाल ने कहा- “अवसंरचना विकास को स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़कर परिषद, भारत की नदी विरासत को पुनर्जीवित कर रही है और माल और यात्रियों के लिए परिवहन के पसंदीदा साधन के रूप में अंतर्देशीय जलमार्गों को पुनः स्थापित कर रही है। कोच्चि में, हमारा लक्ष्य 2024 में आईडब्ल्यूडीसी 1.0 और 2025 में आईडब्ल्यूडीसी 2.0 के बाद से हुई प्रगति को सुदृढ़ करना, परियोजना निष्पादन में तेजी लाना और राज्यों के साथ घनिष्ठ साझेदारी में हरित, प्रौद्योगिकी-संचालित अंतर्देशीय जलमार्गों का विस्तार करना है।”
असम आईडब्ल्यूडीसी 3.0 में
असम में अंतर्देशीय जलमार्ग यातायात में लगातार वृद्धि इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी) ने पिछले दो वर्षों में नीतिगत निर्णयों को ठोस परिणामों में सफलतापूर्वक बदला है। पांडु और जोगीघोपा में बहुस्तरीय टर्मिनलों, धुबरी और बोगीबील में स्थायी टर्मिनलों, कई फ्लोटिंग टर्मिनलों और बांग्लादेश सीमा से सादिया तक सुनिश्चित गहराई रखरखाव के साथ पूर्णतः चालू राष्ट्रीय जलमार्ग 2 (ब्रह्मपुत्र) पूर्वोत्तर क्षेत्र में सतत परिवहन को नया रूप दे रहा है। राष्ट्रीय जलमार्ग 2 असम के अंतर्देशीय जलमार्गों के 98% से अधिक माल का संचालन करता है, जिसमें वाहन, बड़े आकार के माल और निर्माण सामग्री शामिल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी) के नेतृत्व में समन्वय को आगे बढ़ाते हुए, सरकार ने 2025 से 2030 के बीच पूर्वोत्तर में अंतर्देशीय जलमार्ग विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। लगभग 1152 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले से ही कार्यान्वयन के अधीन हैं, और शेष परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं। आगामी आईडब्ल्यूडीसी 3.0 बैठक में डिब्रूगढ़ के क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (आरसीओई) को चालू करने, पांडू में जहाज मरम्मत सुविधा को पूरा करने और हरित पोत संचालन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिससे समन्वित और टिकाऊ अंतर्देशीय जलमार्ग विकास के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में आईडब्ल्यूडीसी की भूमिका को सुदृढ़ किया जा सके। बैठक के दौरान बोगीबील नदी बंदरगाह तक जाने वाली सड़क और उजान बाजार घाट पर एक पर्यटक घाट की घोषणा होने की संभावना है, साथ ही क्षेत्र के जलमार्गों पर 85 घाटों के विकास की योजनाओं की भी घोषणा की जाएगी।
कोच्चि में होने वाली आगामी आईडब्ल्यूडीसी 3.0 बैठक अंतर्देशीय जल परिवहन क्षेत्र की क्षमता और लाभों का मूल्यांकन करने और इसके भविष्य के विकास और विस्तार के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने के लिए एक बहुआयामी मंच के रूप में कार्य करने की उम्मीद है।