अस्पतालों और खेतों में उपयोगी सेंसर बनाने के लिए पेंसिल, कागज और ग्राफीन को एक साथ लाया गया
अस्पतालों और खेतों में उपयोगी सेंसर बनाने के लिए पेंसिल, कागज और ग्राफीन को एक साथ लाया गया
कागज पर पेंसिल की तरह काम करने वाला एक लचीला, कम लागत वाला बहुउद्देशीय सेंसर विकसित किया गया है। यह मिट्टी की नमी को मापने, पौधों में सूखे के तनाव का पता लगाने, मानव श्वास पैटर्न को ट्रैक करने से लेकर स्मार्ट डायपर गीलापन डिटेक्टर के रूप में कार्य करने का काम करेगा है।
आज सेंसर हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग हैं। ये फोन और स्मार्टवॉच में मौजूद हैं और अस्पतालों और खेतों में इनकी आवश्यकता होती है। लेकिन अधिकांश पारंपरिक सेंसर कठोर पदार्थों से बने होते हैं, इनमें सोने या प्लैटिनम जैसी महंगी धातुओं का उपयोग होता है और इनके निर्माण में जटिल प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है। इस कारण ये महंगे, असंतुलित और कृषि या पहनने योग्य स्वास्थ्य निगरानी जैसे बड़े क्षेत्रों में उपयोग के लिए अनुपयुक्त होते हैं।
गौहाटी विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में डॉ. हेमेन कुमार कलिता और उनके पीएचडी छात्रों, राजनंदन लखर और बिस्वजीत देहिंगिया द्वारा किए गए शोध में कृषि और स्वास्थ्य सेवा में अनुप्रयोगों के लिए कम लागत वाली, लचीली और टिकाऊ सेंसर प्रौद्योगिकियों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को संबोधित किया गया है।
शोधकर्ताओं ने पेंसिल से खींचे गए इंटरडिजिटेटेड इलेक्ट्रोडका उपयोग करके कागज पर निर्मित एक लचीला ग्राफीन-आधारित कैपेसिटिव सेंसर विकसित किया है। साधारण पेंसिल का उपयोग करके सीधे कागज पर प्रवाहकीय ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड बनाए जाते हैं, जबकि ग्राफीन ऑक्साइड सक्रिय संवेदन सामग्री के रूप में कार्य करता है। यह विधि महंगी धातुओं, क्लीनरूम सुविधाओं और रासायनिक रूप से गहन निर्माण चरणों की आवश्यकता को समाप्त करती है। परिणामस्वरूप सेंसर हल्का, यांत्रिक रूप से लचीला, पर्यावरण के अनुकूल और अत्यंत किफायती है, जो इसे डिस्पोजेबल और बड़े क्षेत्र के संवेदन अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनाता है।

अंतर्राष्ट्रीय पीयर-रिव्यू जर्नल एसीएस एप्लाइड इलेक्ट्रॉनिक मैटेरियल्स में प्रकाशित शोध कार्य, वर्त्तमान कागज-आधारित और लचीली सेंसर प्रौद्योगिकियों की तुलना में महत्वपूर्ण प्रगति दर्शाता है। जहां पहले के सेंसर अक्सर कम संवेदनशीलता, उच्च निर्माण लागत या एकल-कार्य संचालन जैसी समस्याओं से ग्रस्त होते थे, वहीं विकसित सेंसर उच्च सापेक्ष आर्द्रता पर 1500 प्रतिशत से अधिक प्रतिक्रिया के साथ आर्द्रता और नमी के प्रति असाधारण रूप से उच्च संवेदनशीलता प्रदर्शित करता है।
इसी सेंसर का उपयोग कई वास्तविक अनुप्रयोगों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इनमें मृदा नमी संवेदन, वाष्पोत्सर्जन विश्लेषण के माध्यम से पौधों में सूखे के तनाव की निगरानी, मानव श्वास निगरानी, त्वचा की नमी का पता लगाना, बिना संपर्क के निकटता संवेदन और स्मार्ट डायपर गीलापन पहचान शामिल हैं। इतनी विविध कार्यक्षमताओं को एक ही कम लागत वाले उपकरण में एकीकृत करने की क्षमता इस कार्य की नवीनता और तकनीकी महत्व को उजागर करती है।
कागज के सब्सट्रेट, पेंसिल से खींचे गए इलेक्ट्रोड को एकीकृत करके यह शोध दर्शाता है कि सरल, कम लागत वाले और स्थानीय रूप से अनुकूलनीय तरीकों का उपयोग करके उच्च-प्रदर्शन वाले सेंसर विकसित किए जा सकते हैं।
इस कार्य को डीएसटी-इंस्पायर, डीएसटी अर्ली करियर रिसर्च अवार्ड और डीएसटी-पर्से द्वारा सहयोग प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, डीएसटी-पर्से परियोजना ने उपभोग्य सामग्रियों के अंतर्गत अनुसंधान कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक प्रयोगशाला उपभोग्य सामग्रियों, रसायनों और अन्य आवश्यक सामग्रियों की व्यवस्था की। डीएसटी-पर्से परियोजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त मानव संसाधन इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल थे और उन्होंने अनुसंधान के क्रियान्वयन में योगदान दिया।
प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.1021/acsaelm.5c00315