अंतर्राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता दिवस
अंतर्राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता दिवस
प्रमुख बातें
परिचय
डेटा गोपनीयता दिवस प्रतिवर्ष 28 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। इसका उद्देश्य डिजिटल युग में व्यक्तिगत डेटा और गोपनीयता की सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इसे डेटा संरक्षण दिवस के रूप में भी जाना जाता है। इस दिवस की शुरूआत 2006 में यूरोप परिषद द्वारा कन्वेंशन 108 पर हस्ताक्षर की स्मृति में की गई थी जो डेटा संरक्षण पर दुनिया की पहली कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है।
डेटा गोपनीयता जिम्मेदार डिजिटल शासन का मूलभूत स्तंभ है। यह व्यापक डिजिटल सार्वजनिक मंचों पर नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और संरक्षण करती है। डेटा गोपनीयता सरकारी डिजिटल सेवाओं में विश्वास को मजबूत करके जनता का भरोसा बढ़ाती है। मजबूत डेटा गोपनीयता ढांचे डिजिटल प्रौद्योगिकियों को सुरक्षित, नैतिक और संरक्षित तरीके से अपनाने को बढ़ावा देकर जिम्मेदार डिजिटल उपयोग को सक्षम बनाते हैं। ये दुरुपयोग को रोककर, साइबर खतरों को कम करके और डेटा से संबंधित धोखाधड़ी की पहचान करके डेटा और साइबर जोखिमों को कम करने में भी मदद करते हैं। इसके अलावा, मजबूत डेटा सुरक्षा व्यवस्था पारदर्शिता, प्रभावी निगरानी और स्पष्ट रूप से परिभाषित संस्थागत जिम्मेदारियों को सुनिश्चित करके शासन और जवाबदेही को बढ़ाती है।
तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल समाज में, विश्वास, सुरक्षा और समावेश को बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा आवश्यक है। जैसे-जैसे डिजिटल सार्वजनिक प्लेटफॉर्म का दायरा और प्रभाव बढ़ता जा रहा है, डेटा गोपनीयता के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करती है कि नवाचार नागरिक-केंद्रित, नैतिक और जवाबदेह बना रहे। डेटा गोपनीयता दिवस मनाना डिजिटल अधिकारों की रक्षा में सरकारों, संस्थानों और नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी को सुदृढ़ करता है।
भारत की बढ़ती डिजिटल उपस्थिति और गोपनीयता की अनिवार्यता
देश के तीव्र डिजिटलीकरण ने नागरिकों के राज्य के साथ संवाद करने, सेवाओं तक पहुंचने और शासन में भाग लेने के तरीके को बदल दिया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म अब जनसंख्या के व्यापक स्तर पर काम कर रहे हैं, जिससे डेटा एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संसाधन बन गया है जो सेवा वितरण, समावेशन और नवाचार का आधार है। इस बदलाव ने दक्षता और सुलभता प्रदान करने के साथ-साथ व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के महत्व को भी बढ़ा दिया है। भारत के डिजिटल विस्तार के साथ-साथ, डिजिटल प्रणालियों में गोपनीयता और सुरक्षा को समाहित करना शासन की एक प्रमुख प्राथमिकता बन गई है।




28 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता दिवस का पालन करना जिम्मेदार डेटा प्रथाओं, जन जागरूकता और विश्वास-आधारित डिजिटल शासन के प्रति देश की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है। भारत के डिजिटल प्लेटफॉर्मों के विस्तार और जटिलता को देखते हुए, डिज़ाइन में गोपनीयता को शामिल करना, सशक्त निगरानी और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित करना डिजिटल नवाचार को सुरक्षित, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
राष्ट्रीय डेटा गोपनीयता और सुरक्षा तत्परता
जैसे-जैसे डिजिटल प्रौद्योगिकियां शासन, सेवा वितरण और आर्थिक गतिविधियों का आधार बनती जा रही हैं, डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है। देश के बढ़ते डिजिटल परितंत्र को एक मजबूत कानूनी और संस्थागत ढांचे की जरूरत है जो व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करे, डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाए और नागरिकों तथा व्यवसायों के बीच विश्वास का निर्माण करे। इसके लिए, भारत ने एक व्यापक और विकसित नियामक ढांचा स्थापित किया है जो गोपनीयता संरक्षण को नवाचार, जवाबदेही और अनुपालन में आसानी के साथ संतुलित करता है।
सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 देश के साइबर क्षेत्र से संबंधित प्रमुख कानून है, जो ई-गवर्नेंस, डिजिटल वाणिज्य और साइबर सुरक्षा के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है। राष्ट्रीय डेटा संरक्षण और साइबर सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप, यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों और डिजिटल हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता देता है, जिससे सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन और सार्वजनिक सेवाओं का डिजिटल वितरण संभव हो पाता है। यह अधिनियम साइबर विवादों के लिए न्यायनिर्णय और अपीलीय निकायों के साथ-साथ राष्ट्रीय घटना प्रतिक्रिया एजेंसी के रूप में सीईआरटी-इन सहित प्रमुख साइबर सुरक्षा और नियामक तंत्र भी स्थापित करता है। धारा 3, 3ए, 6, 46, 69ए और 70बी जैसे प्रावधान सामूहिक रूप से प्रमाणीकरण, ई-गवर्नेंस, न्यायनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सामग्री अवरोधन और साइबर घटना प्रबंधन का समर्थन करते हैं, जिससे देश के लिए एक मजबूत और सुरक्षित डिजिटल ढांचा तैयार होता है।
सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021, भारत की विकसित होती डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए हैं। ये नियम मध्यस्थों के लिए उचित सावधानी संबंधी आवश्यकताओं को निर्धारित करते हैं ताकि एक सुरक्षित, विश्वसनीय और पारदर्शी ऑनलाइन वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। नियमों के तहत, सभी मध्यस्थों को उपयोगकर्ताओं या पीड़ितों की शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान करने के लिए एक सशक्त शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना अनिवार्य है।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023
11 अगस्त 2023 को लागू डीपीडीपी अधिनियम, 2023, डिजिटल माध्यमों से एकत्रित व्यक्तिगत डेटा से जानकारी निकाले जाने को नियंत्रित करता है, जिसमें ऑफलाइन स्रोतों से डिजिटाइज़ किया गया डेटा भी शामिल है। यह अधिनियम व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा और नवाचार, सेवा वितरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए डेटा के वैध उपयोग को सक्षम बनाने के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। यह सभी हितधारकों के लिए स्पष्टता, समझने में आसानी और व्यावहारिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सरल, सुलभ, तर्कसंगत और कार्रवाई योग्य (सरल) दृष्टिकोण का अनुसरण करता है।
भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड: अधिनियम की एक प्रमुख संस्थागत विशेषता भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड की स्थापना है, जिसकी जिम्मेदारी अनुपालन की निगरानी करने, डेटा उल्लंघनों की जांच करने और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की है। यह बोर्ड अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने और निवारण एवं प्रवर्तन के लिए एक प्रभावी, जवाबदेह तंत्र प्रदान करके जनता के विश्वास को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
मूल रूप से, डीपीडीपी अधिनियम नागरिकों को डेटा प्रिंसिपल के रूप में सशक्त बनाता है, जिससे लोगों को स्पष्ट अधिकार, उनके व्यक्तिगत डेटा पर अधिक नियंत्रण और उन्हें भारत के डेटा संरक्षण ढांचे के केंद्र में रखा जाता है इस आश्वासन के साथ कि ऐसे डेटा को संभालने वाले संगठन जिम्मेदार, पारदर्शी और जवाबदेह बने रहेंगे।
डीपीडीपी अधिनियम, 2023 के अंतर्गत नागरिकों के अधिकार और संरक्षण
सहमति देने या अस्वीकार करने का अधिकार:
व्यक्ति के पास अपनी व्यक्तिगत जानकारी के उपयोग की अनुमति देने या अस्वीकार करने का विकल्प होता है।
यह जानने का अधिकार कि डेटा का उपयोग कैसे किया जाता है:
व्यक्ति यह जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि कौन सा व्यक्तिगत डेटा एकत्र किया गया है, इसे क्यों एकत्र किया गया है और इसका उपयोग कैसे किया जा रहा है।
व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच का अधिकार:
व्यक्ति डेटा फिड्यूशरी द्वारा संसाधित किए गए अपने व्यक्तिगत डेटा का सारांश मांग सकते हैं।
व्यक्तिगत डेटा को सही करने का अधिकार:
व्यक्ति अपने व्यक्तिगत डेटा में मौजूद अशुद्ध या अपूर्ण जानकारी में सुधार का अनुरोध कर सकते हैं।
व्यक्तिगत डेटा को अद्यतन करने का अधिकार:
व्यक्ति अपने नया पता या नए संपर्क नंबर जैसे विवरण में बदलाव होने पर, इन्हें अद्यतन करने का अनुरोध कर सकता है।
व्यक्तिगत डेटा को मिटाने का अधिकार:
कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति अपने व्यक्तिगत डेटा को मिटाने का अनुरोध कर सकते हैं। डेटा न्यासीय को इस अनुरोध पर विचार करना और कार्रवाई करना आवश्यक है।.
किसी अन्य व्यक्ति को नामांकित करने का अधिकार:
प्रत्येक व्यक्ति अपनी मृत्यु या अक्षमता की स्थिति में अपनी ओर से अपने डेटा अधिकारों का प्रयोग करने के लिए किसी को नियुक्त कर सकता है।
नब्बे दिनों के भीतर अनिवार्य उत्तर:
डेटा न्यासीय को एक्सेस, सुधार, अपडेट या मिटाने से संबंधित सभी अनुरोधों को अधिकतम नब्बे दिनों के भीतर निपटाना आवश्यक है, जिससे समयबद्ध कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
व्यक्तिगत डेटा उल्लंघन के दौरान सुरक्षा:
डेटा को लेकर यदि कोई उल्लंघन होता है, तो संबंधित व्यक्तियों को यथाशीघ्र इसकी सूचना दी जानी चाहिए। संदेश में यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि क्या हुआ और संबंधित व्यक्ति अब क्या कदम उठा सकते हैं।
पूछताछ और शिकायतों के लिए स्पष्ट संपर्क सूत्र:
डेटा न्यासीय को व्यक्तिगत डेटा से संबंधित प्रश्नों के लिए एक संपर्क सूत्र प्रदान करना होगा। यह एक नामित अधिकारी या डेटा संरक्षण अधिकारी हो सकता है।
बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा:
जब किसी बच्चे का व्यक्तिगत डेटा शामिल होता है, तो माता-पिता या अभिभावक की सत्यापित सहमति आवश्यक होती है। यह सहमति तब तक आवश्यक है जब तक कि डेटा का प्रसंस्करण स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा या तत्क्षण सुरक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं से संबंधित न हो।
दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुरक्षा:
यदि कोई दिव्यांग व्यक्ति सहायता प्राप्त होने के बावजूद भी कानूनी निर्णय लेने में असमर्थ है, तो उसके कानूनी अभिभावक की सहमति आवश्यक है। इस अभिभावक का सत्यापन संबंधित कानूनों के तहत किया जाना चाहिए।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025
13 नवंबर 2025 को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 को अधिसूचित किया गया था जो डीपीडीपी अधिनियम, 2023 को क्रियान्वित करते हुए देश के डेटा संरक्षण ढांचे को मजबूत बनाते हैं। ये नियम मिलकर एक स्पष्ट, नागरिक-केंद्रित व्यवस्था स्थापित करते हैं जो नवाचार और जिम्मेदार उपयोग को सक्षम बनाते हुए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करती है।
ये नियम नागरिकों को लागू करने योग्य अधिकार प्रदान करके, संगठनों की जवाबदेही बढ़ाकर और डेटा के दुरुपयोग तथा अनधिकृत शोषण पर अंकुश लगाकर व्यक्तियों को केंद्र में रखते हैं।
डीपीडीपी अधिनियम और नियम मिलकर नियामक स्पष्टता प्रदान करते हैं और नवाचार के साथ गोपनीयता को संतुलित करते हैं, जिससे एक सुरक्षित, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल अर्थव्यवस्था को मदद मिलती है।
कुल मिलाकर, ये रूपरेखाएं देश में डेटा प्रबंधन के लिए एक सुसंगत और दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। अधिकारों, जिम्मेदारियों और प्रवर्तन तंत्रों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके, ये उपाय संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करते हैं, नागरिकों को सशक्त बनाते हैं और डिजिटल प्रणालियों में विश्वास को बढ़ावा देते हैं। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और जटिलता लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में, यह मजबूत कानूनी और नियामक आधार यह सुनिश्चित करता है कि डेटा-आधारित नवाचार सुरक्षित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बना रहे, जिससे भारत एक लचीले और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल परितंत्र के लिए तत्पर हो सके।
डेटा सुरक्षा के लिए अतिरिक्त राष्ट्रीय उपाय
भारत सरकार ने खुले, सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह इंटरनेट परितंत्र को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से साइबर सुरक्षा मानकों को मजबूत करने, डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और साइबर जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की हैं। बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए, निम्नलिखित उपाय लागू किए गए हैं:
ये पहलें साइबर सुरक्षा के प्रति भारत सरकार के व्यापक और दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जिसमें मानक, क्षमता निर्माण, नागरिक जागरूकता और संकटकालीन तैयारी शामिल हैं। संस्थागत तंत्रों को मजबूत करके और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप ढलकर, भारत उभरते साइबर खतरों के मद्देनजर अपने डिजिटल परितंत्र में विश्वास, लचीलापन और सुरक्षा को लगातार बढ़ा रहा है।
निष्कर्ष
डेटा गोपनीयता दिवस इस बात की याद दिलाता है कि विश्वास भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल परितंत्र की आधारशिला है। जैसे-जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना देश भर में शासन, सेवा वितरण और रोजमर्रा की जिंदगी को आकार दे रही है, व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं बल्कि एक लोकतांत्रिक अनिवार्यता है। भारत के विकसित होते कानूनी ढांचे, मजबूत संस्थागत तंत्र और नागरिक केंद्रित पहलें यह सुनिश्चित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं कि डिजिटल नवाचार सुरक्षित, नैतिक और जवाबदेह बना रहे।
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण ढांचा लागू होने, साइबर सुरक्षा संस्थानों को मजबूत करने और क्षमता निर्माण एवं जागरूकता पर निरंतर निवेश के साथ, देश एक सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल वातावरण की ओर तेजी से अग्रसर है। डेटा गोपनीयता के महत्व को पहचानना सरकार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी को मजबूत करता है कि वे व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करें, विश्वास कायम करें और यह सुनिश्चित करें कि भारत का डिजिटल परिवर्तन समावेशी, लचीला और नागरिक केंद्रित बना रहे।
संदर्भ
संचार मंत्रालय
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
गृह मंत्रालय
पीआईबी मुख्यालय
डेटा संरक्षण दिवस, यूरोपीय संघ
डेटा संरक्षण दिवस, यूरोप परिषद
अन्य
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पीआईबी अनुसंधान
- देश के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का विस्तार और पहुंच: देश की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) इसके डिजिटल परिवर्तन की रीढ़ बनकर उभरी है, जिससे सेवाओं की निर्बाध पहुंच और व्यापक नागरिक भागीदारी संभव हो पाई है। आधार जैसी प्रमुख पहलों ने एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान ढांचा स्थापित किया है, जबकि यूपीआई ने तत्क्षण डिजिटल भुगतान के माध्यम से रोजमर्रा के वित्तीय लेनदेन में क्रांति ला दी है। कागज रहित शासन को बढ़ावा देने वाले प्लेटफार्मों ने सार्वजनिक सेवा वितरण को सुव्यवस्थित किया है, और 6 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले मायगॉव जैसे नागरिक केंद्रित प्लेटफार्म ने सहभागी शासन को मजबूत किया है, वहीं ई-संजीवनी ने 44 करोड़ से अधिक डिजिटल स्वास्थ्य परामर्शों की सुविधा प्रदान करके स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच का व्यापक विस्तार किया है। ये सभी पहलें मिलकर भारत की डीपीआई के विस्तार, गहराई और समावेशिता को दर्शाती हैं, साथ ही व्यापक स्तर पर विश्वास बनाए रखने के लिए मजबूत डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुरक्षा उपायों की जरूरत पूरी करती हैं।